वाशिंगटन. कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) के खिलाफ अमेरिका को बड़ी सफलता मिली है. फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने फाइजर (Pfizer) के बाद मॉडर्ना (Moderna) की वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है. संक्रमण के चलते अमेरिका में अब तक 3 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है, जबकि हर रोज 2 लाख से ज्यादा संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं. अमेरिका में स्वास्थ्य कर्मियों को सोमवार से ही मॉडर्ना की एमआरएनए (mRNA) वैक्सीन के टीके लगने शुरू हो जाएंगे. एक हफ्ते पहले फाइजर कंपनी की वैक्सीन के टीके लगने शुरू हो गए. कोरोना वायरस संक्रमण से अमेरिका पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा प्रभावित है. फाइजर की वैक्सीन के साथ समस्या ये है कि उसे -70 डिग्री सेल्सियम पर स्टोर किया जाना अनिवार्य है, जबकि मॉडर्ना की वैक्सीन के लिए -20 डिग्री सेल्सियस तापमान चाहिए होता है.

ब्रिटिश अखबार द डेली टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) द्वारा विकसित की जा रही वैक्सीन AZD1222 को 2021 की शुरुआत में टीके लगाने के लिए दिसंबर में ही अनुमति मिल सकती है. ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन से जुड़ी ये खबर भारत के लिए उम्मीद बंधाने वाली है, क्योंकि यही वैक्सीन कोविशील्ड (Covishield) नाम से सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) साझेदारी के तहत विकसित कर रहा है. आइए जानते हैं कि कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में कौन सी वैक्सीन विकास के क्रम में कहां तक पहुंची है.

मॉडर्ना कोविड-19 वैक्सीन

मॉडर्ना दूसरी कंपनी है, जिसकी वैक्सीन के टीके सोमवार से अमेरिकी लोगों को लगने शुरू हो जाएंगे. वैक्सीन को पहले से ही 3700 स्थानों पर वितरित किया जा चुका है. अगले साल तक कंपनी को वैक्सीन के पूर्ण इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिलने की उम्मीद है. अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन सेंटर के एडवायजरी पैनल ने 18 साल या उससे ऊपर के लोगों को मॉडर्ना की वैक्सीन के टीके लगाने की अनुमति दी है. हालांकि एफडीए ने चेताया है कि किसी भी व्यक्ति को अगर एलर्जी की समस्या हो तो उसे ये वैक्सीन ना दी जाए.ट्रायल में मॉडर्ना वैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ 95 फीसद प्रभावी साबित हुई. वैक्सीन संक्रमण के गंभीर मामलों में भी कारगर साबित हुई है. बड़े पैमाने पर वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल में किसी भी तरह के साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिले हैं. मॉडर्ना को उम्मीद है कि इस साल के अंत तक सिर्फ अमेरिका के लिए 2 करोड़ टीकों का उत्पादन करने में कंपनी कामयाब रहेगी. वहीं, अगले तीन महीनों में कंपनी का लक्ष्य अमेरिका में 8 से 10 करोड़ टीकों के उत्पादन की योजना है.

फाइजर-बॉयोएनटेक कोविड-19 वैक्सीन

अमेरिका में अब तक 1 लाख 28 हजार से ज्यादा लोगों को फाइजर कंपनी की वैक्सीन के टीके लगाए जा चुके हैं. टीकाकरण कार्यक्रम एक हफ्ते पहले ही शुरू हुआ है. हालांकि अमेरिका में एफडीए उन 5 मामलों की जांच में जुटा है, जिनमें लोगों ने वैक्सीन के टीके लेने के बाद एलर्जी की शिकायत की है. इसके चलते अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन सेंटर ने चेतावनी जारी की है कि जिन लोगों में कोरोना वायरस वैक्सीन के चलते गंभीर एलर्जी के लक्षण देखने को मिले हैं, उन्हें वैक्सीन का दूसरा टीका नहीं लगाया जाना चाहिए.

दरअसल, ब्रिटेन की स्वास्थ्य नियामक संस्था ने हाल ही में कहा था कि जिन लोगों को दवा और भोजन को लेकर एनाफिलेक्सिस या गंभीर एलर्जी की शिकायत है, उन्हें फाइजर वैक्सीन के टीके नहीं लगाए जाने चाहिए. हाल ही में अमेरिकी प्रांत टेनेसी में फाइजर वैक्सीन का टीका लगवाने वाली नर्स के भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहोशी की हालत में जाने का वीडियो वायरल हो गया था. इसके बाद से वैक्सीन के सुरक्षित होने को लेकर सवाल खड़े हो गए थे. फाइजर की वैक्सीन को 8 देशों ने आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है. ब्रिटेन के अलावा कनाडा, बहरीन, अमेरिका, मेक्सिको, मलेशिया और स्विटरलैंड के साथ इजरायल ने भी हाल ही में मंजूरी दी है. इजरायल की कोशिश हर दिन 60 हजार लोगों को वैक्सीन का टीका लगाने की है.

ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका कोविड-19 वैक्सीन

फाइजर के बाद, माना जा रहा है कि ब्रिटेन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन को 28 या 29 दिसंबर तक फाइनल डाटा मिलने के बाद आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे सकता है. द डेली टेलीग्राफ ने लिखा, “क्रिसमस के आसपास ऑक्सफोर्ड वैक्सीन को इस्तेमाल की मंजूरी मिल सकती है. इसके बाद जनवरी 2021 में करोड़ों लोगों को वैक्सीन के टीके लगने शुरू हो जाएंगे.” ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की AZD1222 वैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में आगे चल रही प्रमुख वैक्सीन में से आखिरी हो सकती है, जिसे 2020 में इस्तेमाल की मंजूरी मिलेगी. हालांकि वैक्सीन के प्रभावों को लेकर डाटा में काफी अंतर होने की वजह से इसे अप्रूवल मिलने में काफी समय लग रहा है. वैक्सीन के प्रभाव की बात करें तो ये 62 से 90 फीसदी तक रहा है.

क्लिनिकल ट्रायल के पहले और दूसरे चरण के डाटा के आधार पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने हाल ही में कहा था कि वैक्सीन के दो टीके लगवाने व्यक्ति में काफी मजबूत इम्युन सिस्टम देखने को मिला है, बजाय इसके कि व्यक्ति को पहले एक फुल डोज दिया गया हो और बाद में बूस्टर के तौर पर वैक्सीन का आधा डोज दिया गया हो. अगर ब्रिटेन में इस वैक्सीन को इस्तेमाल की मंजूरी मिल जाती है, तो इस बात की संभावना ज्यादा है कि भारत में भी इस वैक्सीन को आवश्यक अनुमति मिल सकती है. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कहा है कि भारत में जनवरी में टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हो सकता है और दिसंबर के आखिर में कंपनी के वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी मिल सकती है. सीरम भारत में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन का ट्रायल कर रहा है.

जॉनसन एंड जॉनसन की कोविड-19 वैक्सीन 

अपनी प्रतिद्वंदी कंपनियों फाइजर और मॉडर्ना के मुकाबले कोरोना वायरस वैक्सीन विकसित करने में पिछड़ी जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि आखिरी दौर के ट्रायल के लिए कंपनी ने 45 हजार कैंडिडेट्स पर वैक्सीन के एक डोज वाले टीके का परीक्षण शुरू किया है और इस स्टेज का फाइनल डाटा जनवरी के अंत में आ सकता है. जॉनसन एंड जॉनसन ने कहा कि कंपनी की वैक्सीन का एक टीका कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई को ज्यादा आसान बना देगा, जबकि फाइजर, मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन के दो टीकों की जरूरत होती है.

कंपनी ने अपने बयान में कहा कि अगर ट्रायल के आखिरी दौर के डाटा सुरक्षित और प्रभावी साबित हुए तो फरवरी में अमेरिकी फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) के पास वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी के लिए आवेदन करेंगे. अक्टूबर महीने में ट्रायल के दौरान एक व्यक्ति में “अपरिभाषित बीमारी” के लक्षण विकसित होने के बाद जॉनसन एंड जॉनसन ने अपनी वैक्सीन का ट्रायल एक हफ्ते के लिए रोक दिया था.

दूसरी ओर कंपनी ब्रिटेन में कोरोना वायरस वैक्सीन के दो टीकों वाले प्रारूप का भी हजारों लोगों पर आखिरी दौर के ट्रायल कर रही है.





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