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राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उससे तो साफ है कि हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। पिछले कई दिनों से संक्रमण के नए मामलों और मरने वालों का आंकड़ा देख केंद्र और दिल्ली सरकार के भी हाथ-पैर फूल रहे हैं। इसीलिए संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए एक बार फिर से कुछ इलाकों और बाजारों में पूर्णबंदी लगाने के बारे में सोचा जा रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से लिखित अनुरोध कर व्यस्त बाजारों में पूर्णबंदी लगाने की इजाजत मांगी है।

कोरोना से बिगड़ते हालात पर गृह मंत्री भी दिल्ली सरकार के साथ बैठक कर चुके हैं। उसके बाद से ही यह साफ हो गया था कि स्थिति से निपटने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार अब कड़े फैसले कर सकती है। हालांकि अब तक दिल्ली सरकार की ओर से यह दावा किया जाता रहा कि हालात काबू में हैं और पूर्णबंदी की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन अब लग रहा है कि सरकार के समक्ष पूर्णबंदी जैसे कदम के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

अभी तक तो कहा जा रहा था कि कोरोना संक्रमण की यह दूसरी या तीसरी लहर है और आने वाले दिनों में इसका असर कम हो जाएगा। लेकिन अब स्थिति गंभीर रूप धारण कर चुकी है। चरणबद्ध तरीके से देशव्यापी पूर्णबंदी हटाए जाने के बाद से दिल्ली में पिछले कुछ महीनों में जिस तरह से लोगों का आवागमन शुरू हुआ, उससे बाजारों में फिर से भीड़ लगने लगी। खासतौर से त्योहारी मौसम में दीपावली के पहले बाजारों में जैसी भीड़ उमड़ी, उससे लग गया था कि आने वाले दिनों में दिल्ली में कोरोना का विस्फोट होकर रहेगा।

यह आशंका बेवजह नहीं थी। लोगों ने जिस तरह से लापरवाही बरती, बिना मास्क लगाए और सुरक्षित दूरी का पालन किए लोग बाजार में निकले, उस हालत में संक्रमण को फैलने से कैसे रोका जा सकता है! फिर दिल्ली सरकार भी जनजीवन को सामान्य बनाने के मकसद से प्रतिबंधों में जिस तरह ढील देती चली गई, वह भी संक्रमण को न्योता देना ही था। न तो लोगों ने परवाह की और न सरकार ने बचाव के पूरे कदम उठाए। उसी का नतीजा है कि आज हजारों नए संक्रमित रोज सामने आ रहे हैं।

इसमें भी कोई संदेह नहीं कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने काफी अच्छा काम किया और उसके प्रयासों की प्रधानमंत्री तक ने प्रशंसा की। दिल्ली के साथ एक समस्या यह भी है कि राष्ट्रीय राजधानी होने की वजह से यहां सबसे ज्यादा आवाजाही रहती है, दूसरे राज्यों के लोग भी अपने कामकाज से लेकर इलाज कराने के तक लिए यहां आते हैं। ऐसे में संक्रमितों की संख्या बढ़ना स्वाभाविक है।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। आर्थिक गतिविधियों को भी पटरी पर लाना है। ऐसे में लंबे समय तक के लिए पूर्णबंदी की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसीलिए दिल्ली सरकार ज्यादा संक्रमण वाले इलाकों को निषिद्ध क्षेत्र बनाती रही है और खतरे से बाहर आ जाने पर उन्हें फिर से खोल दिया जाता है। लेकिन अब हालात इतने बिगड़ गए हैं कि बाजारों में भीड़ को काबू करना मुश्किल हो गया है। कारोबारी तो पूर्णबंदी के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं, क्योंकि जैसे-तैसे अब काम-धंधा शुरू हुआ है। कोरोना से लड़ने में सरकारों के प्रयास तो अपनी जगह हैं ही, इससे भी बड़ी जरूरत है लोग जागरूक और जिम्मेदार बनें और संक्रमण से बचाव के जरूरी नियमों का पालन करें, जो कि देखने को नहीं मिल रहा है।

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