Saturday, July 24, 2021
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Opinion: हांफता सिस्टम और न थमने वाला जहरीली शराब का काला कारोबार! Opinion: The gasping system and the unstoppable black business of spurious liquor! | – News in Hindi


क्रूर कोरोना का कष्टकाल आखिरी दौर में पहुंचता दिख रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश में लाशों का अंबार और पीड़ितों का चीत्कार थमने का नाम नहीं ले रहा है. त्रासदी और गरीबी का गम गलत करने की कृत्रिम कोशिशों में सरकारी शराब पीकर अलीगढ़ की हालिया घटना से तमाम सवाल एक बार फिर जेरे बहस हैं, जो इस सूबे में गुजरे चार सालों से अक्सर उठते रहे हैं. क्या प्रदेश सरकार जहरीली शराब से लोगों की जान बचाने में फेल रही है.

पड़ोसी राज्य बिहार में पूर्ण शराबबंदी है फिर भी वहां अवैध शराब बनाने का काम कुटीर उद्योग की तरह चलता बताया जाता है, फिर भी वहां से मौत की खबरें यदा कदा ही सुनने को मिलती हैं तो उत्तर प्रदेश की सरकारी ठेकों से खरीदकर शराब पीने वाले वालों की खबरें करीब करीब हर महीने सुर्खियां क्यों बनती हैं.

क्या मायावती और अखिलेश यादव सरकार के समय से चल रहे शराब सिंडिकेट को तोड़कर ज्यादा राजस्व पाकर सरकार आत्ममुग्ध हो गई है और उसे मदिरा की जगह जहर के कारोबारी इन फुटकर ठेके वालों को ठीक करने का कोई उपाय नहीं सूझा है. दरअसल सवाल बहुत हैं और अगर सरकार के जिम्मेदार अफसरों से आप जवाब चाहें तो हरगिज नहीं मिलेगा.

ऐसे समझें हालात

हालात को समझने के लिए शुक्रवार को प्रदेश में हुई दो दुर्घटनाओं का जिक्र जरूरी है. शुक्रवार को सबेरे सबेरे अलीगढ़ से दर्दनाक खबर आई कि जिले में तीन अलग अलग इलाकों के सरकारी ठेके से देसी दारू खरीदकर पीने वाले डेढ़ दर्जन लोगों की मौत हो गई. असल में यह संख्या और ज्यादा, करीब दो दर्जन बताई जा रही है. शुक्रवार शाम को राजधानी लखनऊ के पड़ोसी जिले से सूचना मिली कि नकली शराब के अड्डों पर छापा डालने पहुंची पुलिस टीम को मौत के सौदागरों ने जमकर पीटा, गाड़ी तोड़ दी और जवानों को किसी तरह जान बचाकर भागना पड़ा और करीब इसी वक्त सरकारी खबर आई कि मुख्यमंत्री ने अलीगढ़ की घटना के गुनाहगारों के खिलाफ एनएसए जैसी सख्त कार्रवाई के साथ ही उनकी संपत्ति जब्त कर उससे पीड़ितों के परिवारों को मुआबजा दिए जाने के आदेश दिए हैं. एनएसए वाली कार्रवाई का ऐलान अभी दो महीने पहले हुए जहरीली शराब कांड के समय भी हुआ था.

एक के बाद ऐ वारदात
वैसे यह इस साल सूबे में जहरीली शराब कांड की छठी बड़ी वारदात है. प्रदेश में जहरीली शराब के कारण मौत की लगातार घटनाएं थम नही रही हैं. इस साल प्रतापगढ़, प्रयागराज, चित्रकूट, बांदा, आंबेडकर नगर, आजमगढ़,  बुलंदशहर और हाथरस में जहरीली शराब पीने से तमाम लोगों की मौत हो चुकी है. प्रतापगढ़ में तो तीन और प्रयागराज में दो बार इस तरह के कांड हो चुके हैं.दरअसल शुक्रवार को अलीगढ़ जिले के तीन अलग-अलग इलाकों में ठेकों से अवैध देशी शराब खरीदकर पीने वाले 22 लोगों की मौत हो गई. प्रशासन अभी तक 18 लोगों की मौत की पुष्टि कर रहा है. डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है. छह लोग ऐसे भी हैं, जिनकी मौत के बाद परिवारों ने बिना पुलिस प्रशासन को सूचना दिए अंतिम संस्कार कर दिया.

…तो मचा हड़कंप
सुबह खबर मिलते ही जिला पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया. डीआईजी, डीएम, एसएसपी, आबकारी अधिकारी सहित पूरा अमला मौके पर पहुंच गया. दोपहर में एडीजी जोन भी यहां पहुंचे. पुलिस टीमों ने धरपकड़ करते हुए जिले में शराब तस्करी रैकेट के तीन मुख्य आरोपियों को चिह्नित कर एक मुख्य शराब कारोबारी सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो मुख्य आरोपी फरार हैं, जिन पर एडीजी ने 50-50 हजार का इनाम घोषित किया है. मुख्य आरोपियों में एक ऋषि शर्मा भाजपा से जुड़ा हुआ हैं और निवर्तमान ब्लाक प्रमुख का पति है.

पंचायत चुनाव में बढ़ता धंधा
वास्तव में अभी कुछ समय पहले ही पंचायत चुनाव आते ही गांव गांव में कच्ची लहन की खुशबू फैल गयी थी. अवैध शराब का धंधा उफान पर था तो नशे को दुगना करने के लिए तैयार की जा रही जहरीली शराब से मौतों की खबरे अखबारों के पन्ने रंग रही थीं. उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के समय कई गांवों में प्रत्याशी प्रसाद की तरह शराब परोसते हैं. बड़ी खपत के लिए शराब की भट्ठियां गांवों के छोटे मजरों में कारखाने की तरह सजा दी जाती हैं. इनमें से कुछ चुनाव बाद बंद हो जाती हैं तो कुछ स्थायी हो जाती हैं. जहरीली शराब का कारोबार साल भर चलता है और चुनाव या त्यौहार जैसे खास मौकों पर इनकी बड़ी बरामदगी भी खास तौर पर की जाती है. पिछले दो महीनों के दौरान लगभग सभी जिलों में ऐसी बरामदगियां की गई हैं.

दारू की महिमा का बखान
पंचायत-प्रधानी के चुनाव में जिताऊ फार्मूले में दारू की महिमा का बखान करते हुए एक बड़े लीडर खुलासा करते हैं कि अपने कार्यकर्ता को तो थोड़ी- थोड़ी पीने की हिदायत दी जाती है, लेकिन विरोधी के समर्थकों को जमकर छकाई जाती है. पंचायत चुनाव की दारू पार्टी के अभी प्रतापगढ़ और अयोध्या में आधा दर्जन से ज्यादा लोग जान गवां चुके हैं तो बदायूं जिले में भी इसी जहरीली शराब से चार लोग परलोक सिधार गए. इसके पहले बुलंदशहर के सिकंदराबाद में जहरीली शराब पीने से छह लोगों की मौत दुखद घटना हुयी तो प्रयागराज और मिर्जापुर में भी लोग मारे गए.
तमाम कोशिशों के बावजूद इस सरकार के कार्यकाल में अभी तक जहरीली शराब पीने से मौत की जितनी घटनाएं हुई हैं, पिछले कई दशकों में नही हुई थीं. नकली और दूसरे राज्यों से लाई गई शराब की बड़े पैमाने पर बरामदगी हुई है और दर्जनों की तादाद में आबकारी और पुलिस महकमे के अफसर-कर्मी सस्पेंड भी हुए हैं, फिर भी स्थिति पर काबू न हो पाना सरकार के लिए चिंताजनक है.

आजगढ़ में 12 की मौत
मार्च 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद जुलाई, 2017 में आजमगढ़ में जहरीली शराब पीने से 12 लोगों की मौत हो गई थी. बीते साल इसी तरह की घटना राजधानी के पड़ोसी जिले बाराबंकी में हुयी थी जहां आधा दर्जन लोगों की मौत हुयी थी. शराब से प्रतापगढ़, प्रयागराज चित्रकूट, अयोध्या में समेत कई जिलों में मौतें हुई. इस साल सिर्फ मार्च के महीने में 25 लोगों की मौत जहरीली शराब पीने हुई थी.
माना जाता है कि यूपी में शराब माफिया पर तो अंकुश जरुर लगा लेकिन उनकी जगह इस धंधे पर काबिज हुए छोटे कारोबारियों को असली की जगह नकली का खेल कुछ ज्यादा ही रास आ रहा है. यूपी में बड़े पैमाने पर सरकारी लाइसेंसी दुकानों पर हरियाणा से मंगायी गयी नकली शराब धड़ल्ले से बिकती है तो गांव-गांव में कुटीर उद्योग की तरह भी इसका उत्पादन किया जा रहा है. दरअसल भाजपा सरकार ने सपा और बसपा की सरकारों में अंग्रेजी शराब के कारोबार में एकाधिकार रखने वालों का नेटवर्क तो खत्म किया, लेकिन कच्ची और देशी शराब के स्थानीय माफियाओं का नेटवर्क तोडऩे में यह नाकाम रही है.

कड़वी हकीकत
यह कड़वी हकीकत है कि यूपी में अरसे से शराब के कारोबार पर काबिज एक सिंडीकेट के टूटने और नयी आबकारी नीति के आने के बाद से अवैध धंधे ने परवाज भरी है. जहां पहले सिंडीकेट खुद ही अवैध शराब के धंधे पर लगाम लगाने के लिए पूरी फौज उतारता था और आबकारी विभाग के लचर तंत्र को बस नाम के लिए अपने साथ रखता था वहीं अब गांव गांव में ग्राम प्रधान से लेकर शहरों में छुटभैय्या कारोबारियों के हाथ में शराब का वैध कारोबार चला गया. ये नए कारोबारी राजस्व देने से बचने के लिए खुद ही हरियाणा और पड़ोसी सूबों की शराब बेचने से लेकर नकली माल तक बेचते हैं.

नए नियमों का भी डर नहीं
यह किसी से छिपा तथ्य नहीं है कि उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में गांवों में दो-ढाई दशक में शराब कुटीर उद्योग की तरह पनपा है. यह उद्योग कहीं ढके-छिपे स्वरूप में नहीं चल रहा, बल्कि स्थानीय पुलिस व आबकारी अधिकारियों के बाकायदा संरक्षण में चलता है. साल 2017 में आजमगढ़ में शराब से मौतों के बाद सरकार ने आबकारी अधिनियम में संशोधन कर सख्त प्रावधान किए थे. नई धारा 60 (क) जोड़ी गई थी. इसके तहत किसी की मौत हो जाने पर जहरीली शराब बनाने और बेचने वाले को उम्र कैद या मृत्युदंड की सजा, दस लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया था.

माना गया था कि आबकारी अधिनियम में सख्त प्रावधान से अवैध शराब का कारोबार करने वाले भयभीत होंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. हालिया घटनाओं के बाद तो सरकार ने नकली शराब के कारोबारियों पर गैंगस्टर एक्ट तक लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं. आबकारी मंत्री राम नरेश अग्निहोत्री कई बार कह चुके हैं कि अवैध शराब बेचने वालों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा. आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की जाएगी. इसके पहले योगी सरकार के पहले आबकारी मंत्री जय प्रताप सिंह भी यही दावे और आदेश करते थे लेकिन उनके कार्यकाल में अवैध शराब से जान जाने की सर्वाधिक घटनाएं हुईं. हालांकि मंत्रिमंडल में बदलाव हुआ तो उन्हें स्वास्थ्य एवं चिकित्सा महकमा दे दिया गया.

क्या नहीं मिल रही शिकायतें
अपर मुख्य सचिव आबकारी संजय भूसरेड्डी कहते हैं कि शराब के अवैध कारोबार को रोकने के लिए टोल फ्री और व्हाट्सएप नंबर जारी किए गए थे. आबकारी विभाग के अधि‍कारी कानून का असर न दिखने के पीछे पुलिस और अभियोजन प्रक्रिया में गड़बड़ी की बात कहते हैं. हालांकि कमी आबकारी विभाग के मौजूदा तंत्र में भी बहुत है. शराब के अवैध कारोबार की सुरागरसी और धड़पकड़ के लिए जो महत्वपूर्ण एजेंसियां प्रवर्तन दल और स्पेशल स्ट्राइकिंग फोर्स है. इनमें प्रवर्तन दल तो संसाधनों की कमी से जूझ रही है जबकि स्पेशल स्ट्राइकिंग फोर्स में तैनात अधिकारियों को डिस्टलरियों की 24 घंटे निगरानी के लिए तैनात कर रखा गया है. आबकारी अधिकारी, इंस्पेक्टर की तैनाती डिस्टलरी की निगरानी के लिए करना विभाग की मंशा पर सवाल उठाता है. इससे ही शराब के अवैध कारोबारियों को खुली छूट मिली हुई है. आबकारी अधिकारियों की शिकायत व्यवस्थापन से जुड़े कार्योँ को ज्यादा महत्व दिए जाने से भी है.
आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार का सबसे ज्यादा जोर राजस्व बढ़ाने पर है और जहरीली शराब की धरपकड़ उसकी प्राथिमकता में बहुत नीचे आता है. जहराली शराब को लेकर सरकार तभी जागती है जब कुछ घटनाएं हो जाती हैं.

सरकार के लिए सबसे मालदार महकमा
वर्ष 2017-18 में आबकारी विभाग का अनुमानित राजस्व साढ़े पंद्रह हजार करोड़ से अधिक था तो वर्ष 2018-19 में इसमें साढ़े चार हजार करोड़ की बढ़ोतरी कर दी गई है. वर्ष 2020-21 में जब कोरोना महामारी के दौरान सारी दुकानें बंद थी उस वक्त शराब की दुकानें खोल कर राजस्व जुटाया गया. पहली अप्रैल से शुरू हुए इस नए वित्तीय वर्ष में राज्य में शराब व बीयर की बिक्री से आबकारी के मद में 35500 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य तय हुआ है.

दरअसल उत्तर प्रदेश में योगी सरकार को अपने पहले साल में ही शराब कारोबार से राजस्व में बड़ी बढ़ोत्तरी मिलनी शुरू हो गई थी. पिछले साल की तुलना में यह राजस्व 75 फीसदी बढ़ा है. सरकारी आंकड़े तस्दीक करते हैं कि 2018-19 के अप्रैल और मई महीने में सरकार को 4, 558 करोड़ रुपये का राजस्व मिला जबकि पिछले साल इसी साल मात्र 2,603 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था. उस समय राज्य में मायावती और अखिलेश यादव की सरकारों के वक्त की नीति चालू थी.

योगी सरकार द्वारा राजस्व बढ़ाने के उपायों से विदेशी शराब का वर्ष 2018-19 अप्रैल-मई में 233 लाख बोतलों के मुकाबले अगले सा साल इन दो महीनों में 372 लाख बोतलों का उत्पादन हुआ. यहां आंकड़ा पिछले साल के उत्पादन से 60 फीसदी ज्यादा था. वहीं देशी शराब का उत्पादन उस साल अप्रैल और मई महीने में 549 लाख लीटर हुआ था जो अगले साल 699 लाख लीटर हुआ, यानि 27 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई. बियर का उत्पादन भी इस साल 25 फीसदी ज्यादा हुआ. 2018-19 के अप्रैल और मई महीने में इसका उत्पादन 553 लाख बोतल हुआ था जो अगले साल 693 लाख बोतल हो गया था.

दरअसल उस समय आठ निवेशकों के साथ शराब उत्पादन का एमओयू साइन किया गया था. इनमें लॉर्ड्स, रैडिको खैतान, आईजीएल, धामपुर, वेव, सुपीरियर, राजस्थान लिकर के साथ तीन नई कंपनियों हरियावन-हरदोई, साथियावा- आजमगढ़ और स्नेह रोड बिजनौर को शामिल किया गया था. त्रिवेणी, बलरामपुर, मनकापुर और बाभनन शराब फैक्टिरयों में भी उत्पादन बढ़ा है. बृजनाथपुर, गजियाबाद ऑर्गेनिक, नवाबगंज, गोंडा की जो शराब बनाने वाली फैक्ट्रियां बंद हो गईं थीं वे फिर से खुल गईं.

राजस्व में वृद्धि का कुछ हद तक कारण शराब की खपत में वृद्धि, उत्पादन में वृद्धि और सरकार की नई आबकारी नीति रही. सरकार द्वारा लागू की गई नई आबकारी नीति से बाजार को विनियमित किया गया और काले कारोबार पर निंयत्रण का दावा किया गया था. हालांकि अप्रैल की अपेक्षा मई में शराब की बिक्री कम हुई. अप्रैल में 2,372 करोड़ रुपये की शराब बिकी थी। मई में यह घटकर 2,187 करोड़ हो गई.

इसी महीने बढ़ाए शराब के दाम
राज्य सरकार ने कोरोना काल के दौरान जब अभी इसी महीने शराब के दाम बढ़ाए तो इसे कोरोना सेस के रूप में जाना गया. क्योंकि राजस्व प्राप्ति के अन्य सरकारी उपाय शिथिल हो गए थे. कोरोना के चलते हो रहे राजस्व घाटे की पूर्ति के लिए ये कदम उठाया गया. इसके तहत मौजूदा आबकारी नीति 2021-22 में संशोधन करते हुए राज्य शासन ने रेगुलर कैटेगरी की शराब पर 10 रुपये प्रति 90 एमएल पर विशेष अतिरिक्त प्रतिफल शुल्क लगा दिया.

प्रीमियम कैटेगरी की शराब पर भी प्रति 90 एमएल पर 10 रुपये, सुपर प्रीमियर पर प्रति 90 एम एल 20 रुपये, स्कॉच पर प्रति 90 एमएल पर 30 रुपये और समुद्र पार आयातित शराब पर भी प्रति 90 एमएल 40 रुपये अतिरिक्त प्रतिफल शुल्क लगाया गया.
इस शासनादेश के मुताबिक प्रदेश में कांच की बोतलों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए यूपी मेड लिकर की आपूर्ति टेट्रा पैक और कांच की बोतलों में किये जाने की अनुमति दी गई और अब उत्पादक डिस्टैलरी को यूपी मेड लिकर की 25 प्रतिशत आपूर्ति कांच की बोतलों में करना पड़ता है.
सेना व अन्य केंद्रीय अर्धसैनिक बल को दी जाने वाली पुरानी सुविधा को बहाल कर दिया गया. अब प्रीमियम श्रेणी से उच्च श्रेणी की शराब की आपूर्ति पर निर्धारित प्रतिफल फीस का 60 प्रतिशत देना पड़ता है. पहले चालू सत्र में यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी.

अलीगढ़ में एक्शन
जिला आबकारी अधिकारी, आबकारी निरीक्षक और प्रधान आबकारी सिपाही को निलंबित किया है. तीनों ही अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. दोषियों के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई की जा रही है.
प्रथम दृष्टया दोषी पाए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के अलावा तीन इलाकों के पुलिस उपाधीक्षकों और दो उप जिलाधिकारियों के साथ ही सम्बंधित थानाध्यक्षों की जिम्मेदारी तय करने के लिए अपर जिलाधिकारी को मजिस्ट्रेसी जांच सौंपी गई है. अवैध शराब पीकर बीमार हुए लोगों को एंबुलेंसों से जिला अस्पताल भेजा गया। इसी बीच पता चला कि गांव के बाहर आईओसी बाटलिंग प्लांट पर आने वाले कंटेनरों के दो चालक लापता हैं. उन्हें पुलिस ने खोजा तो वे अपने कंटेनेरों में बेसुध पड़े थे. उन्हें भी अस्पताल भिजवाया गया. इसके अलावा इलाके के गांव नंदपुर पला, राइट, हैवतपुर से भी शराब पीकर बीमार होने की खबरों पर वहां से भी बीमारों को अस्पताल भिजवाया गया. इसी तरह गभाना के गांव सांगौर से भी एक बीमार को अस्पताल भेजा गया। अस्पताल से इनमें से 9 लोगों की मौत हो गई.

इधर, कुछ घंटों बाद जवां इलाके के गांव छेरत में भी तीन लोगों की इसी तरह से शराब पीने से मौत की खबर मिली. वहां से भी तीनों शवों को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया. इस तरह दोपहर होते-होते पोस्टमार्टम केंद्र पर 12 शवों के आने पर तमाम ग्रामीण और सियासी जमावड़ा लग गया. जिन डेढ़ दर्जन लोग लोगों का जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में इलाज किया जा रहा है उनमें से कई लोगों को आंखों से न दिखाई देने की शिकायत है. मामले मे जिले के एक बडे़ शराब कारोबारी रालोद नेता अनिल चौधरी सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. भाजपा से जुड़े जवां के निवर्तमान ब्लाक प्रमुख के पति ऋषि शर्मा व विपिन यादव फरार हैं, जिन पर इनाम घोषित किया गया है.

डीएम चंद्र भूषण सिंह कहते हैं कि जिले लोधा, जवां व खैर इलाकों में जहरीली शराब पीने से 18 लोगों की मौत हुई है. कुछ लोग बीमार भी हैं, जिनका इलाज कराया जा रहा है. प्रकरण में अब तक जिन 5 शराब ठेकों से शराब खरीदे जाने की जानकारी मिली है, उनको सीज कर उनसे सैंपल संकलित कर जांच को भेजे हैं. साथ में ग्रामीणों द्वारा खरीदी गई शराब की शीशियों में शेष शराब भी मिली है, उन्हें भी जांच के लिए भेजा है. बाकी मजिस्ट्रेटी जांच कराई जा रही है, आरोपियों की तह तक पहुंचने का काम पुलिस स्तर से किया जा रहा है, हर संभव उचित व ठोस कार्रवाई की जाएगी.(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)



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