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केंद्र सरकार ने मंगलवार को तमिलनाडु स्थित निजी क्षेत्र के ऋणदाता लक्ष्मी विलास बैंक पर मोरोटोरियम लगा दिया। इसके साथ ही एक महीने के लिए बैंक पर 25,000 रुपए की निकासी का कैप लगा दिया। वित्त मंत्रालय की सूचना के मुताबिक बैंक के ग्राहक 17 नवंबर शाम छह बजे से 16 दिसंबर तक 25 हजार रुपए से अधिक की निकासी नहीं कर सकेंगे। हालांकि मेडिकल इलाज, उच्च शिक्षा के भुगतान की फीस और विवाह खर्च के लिए आरबीआई की अनुमति से अधिक रकम निकालने की मंजूरी मिल सकेगी।

बता दें कि इस साल सितंबर महीने में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मीता माखन के नेतृत्व में नगदी की तंगी से जूझ रहे बैंक को चलाने के लिए तीन सदस्यीय कमिटी का गठन किया था। दरअसल बैंक को परिसंपत्ति में गिरावट के कारण तत्काल पूंजी की जरूरत थी और पिछले एक साल से खरीदार खोजने के लिए हाथ-पांव मार रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक बैंक की मुसीबतें साल 2019 में बढ़ना शुरू हुईं जब आरबीआई ने इंडियाबैंस फाइनेंस के साथ इसके विलय को प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल आरबीआई ने पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक (PMC) से छह महीने के लिए ग्राहकी निकासी पर कैप लगा दिया था। आईबीआई ने निकासी सीमा 25 हजार रुपए तय की जिसे बाद में बढ़ाया जाता रहा। दरअसल पीएमसी बैंक के खिलाफ वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद केंद्रीय बैंक ये कदम उठाया। रिजर्व बैंक ने इसके साथ ही कई अन्य तरह के प्रतिबंध भी लगाए।

आरबीआई ने इस साल मार्च में नकदी संकट से जूझ रहे निजी क्षेत्र के येस बैंक पर भी कई तरह प्रतिबंध लगा दिए थे। बैंक के निदेशक मंडल को भंग कर दिया गया। जमाकर्ताओं पर निकासी सीमा के अलावा बैंक के कारोबार पर भी कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे। बैंक ग्राहकों के लिए निकासी सीमा पचास हजार रुपए तय कर दी थी।

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