India China Faceoff: LAC पर क्या है चीन का वॉर प्लान? वायुसेना के अधिकारी ने किया खुलासा
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चीन को जवाब देने के लिए भारत सीमा क्षेत्रों में सड़कें बना रहा है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 24, 2020, 8:25 AM IST

नई दिल्ली. भारत और चीन सीमा पर जारी गतिरोध बीते पांच महीने से चल रहा पूर्वी लद्दाख में LAC और अक्साई चिन में चीन की पीपुल लिबरेशन आर्मी के कम से कम 50 हजार सैनिक तैनात हैं. सैनिकों के साथ ही चीन ने सीमा पर भारी हथियार और मिसाइलें भी जमा कर रखी हैं. भारतीय वायुसेना के एक सीनियर ऑफिसर ने दावा किया है कि सीमा पर तैनाती और सैन्य उपकरणों की मौजूदगी ही नहीं बल्कि युद्ध की रणनीति बनाने और उसे लागू करने में रूस के प्रभाव का संकेत दिख रहा है.

नाम न छापने की शर्त वायुसेना के अधिकारी ने सबसे खराब स्थिति में चीनी पोजिशनिंग और वॉर प्लानिंग के बारे में बताया. अधिकारी ने कहा कि चीन द्वारा युद्ध की परिस्थिति में आर्टिलरी और रॉकेट के एक बैराज के साथ आगे बढ़ने वाले सैनिकों को शामिल करने की संभावना है. अधिकारी ने कहा, ‘युद्ध लड़ने का यह पुराना सोवियत तरीका है, जिसमें सैनिक ज्यादा अंदर के क्षेत्रों में तैनात होते हैं (इस मामले में, वास्तविक नियंत्रण रेखा से हॉटन एयरबेस 320 किलोमीटर दूर है) और इन्हें एयर डिफेंस मिलता है.

अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि भारतीय सेना सबसे खराब स्थिति में चीनी हमले का मुकाबला कर सकती है और कहा कि सेना 10 दिनों के युद्ध के लिए तैयार है. नरेंद्र मोदी सरकार ने 2016 के उरी सर्जिकल स्ट्राइक के बाद महत्वपूर्ण गोला बारूद और मिसाइलों की आपातकालीन खरीद की अनुमति दी और 2019 बालाकोट में पाकिस्तान के खिलाफ हमले हुए. अधिकारी ने कहा कि ‘भारत-चीन  के बीच बिना वैश्विक हस्तक्षेप के युद्ध   10 दिनों से अधिक जारी रहने की संभावना नहीं है. देश में गोला बारूद 40 दिनों और पारंपरिक बम 60 दिनों के लिए उपलब्ध है.’

उन्होंने कहा कि चार या पांच और राफेल पर फ्रांस में वायुसेना के पायलट ट्रेनिंग ले रहे हैं. यह भी अगले महीने अंबाला स्क्वाड्रन में शामिल होने को तैयार है. उन्होंने बताया कि न्यू लद्दाख कॉप्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मनने भी टेक ओवर करने को तैयार हैं.भारतीय सेना ने पैंगोंग त्सो के उत्तरी तट की प्रमुख ऊंचाइयों पर भी नियंत्रण हासिल कर लिया है, जहां प्रतिद्वंद्वी सैनिकों को एक-दूसरे से लगभग सौ मीटर की दूरी पर तैनात किया गया है. यहां से फिंगर 4 रिजलाइन पर पीएलए के सैनिकों की तैनाती भी देखी जा सकती है.





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