भारत अपनी जरूरत का 85 फीसद से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से खरीदता है। कच्चा तेल बैरल में आता है। एक बैरल यानी 159 लीटर। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत अभी मिनरल वाटर के एक बोतल जितनी है। ‘पेट्रोलियम प्लानिंग और एनालिसिस सेल (पीपीएसी)’ के मुताबिक, 14 दिसंबर को कच्चे तेल की कीमत तीन हजार 705 रुपए प्रति बैरल की थी।

एक बैरल में 159 लीटर कच्चा तेल मिल रहा है। दरअसल, जून 2010 में सरकार ने तय किया कि अब से पेट्रोल की कीमतें सरकार नहीं, बल्कि तेल कंपनियां ही तय करेंगी। उसके बाद अक्तूबर 2014 में डीजल की कीमतें तय करने का अधिकार भी तेल कंपनियों को ही दे दिया गया।

अप्रैल 2017 में तय किया गया कि अब से रोज ही पेट्रोल-डीजल के दाम तय होंगे। उसके बाद से ही हर दिन पेट्रोल-डीजल के दाम तय होने लगे। तर्क दिया गया कि इससे कच्चे तेल की कीमतें घटने-बढ़ने का फायदा आम आदमी को पहुंचेगा, तेल कंपनियां भी फायदे में रहेंगी। इससे आम आदमी को फायदा नहीं हुआ, लेकिन तेल कंपनियों का मुनाफा बढ़ता चला गया।

फायदा कहां जा रहा है

जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घट रहे थे तो सरकारों ने कर बढ़ाए। जब कच्चे तेल के दाम बढ़े तो न सरकारों ने कर कम किए और न ही तेल कंपनियों ने अपना मुनाफा कम किया। इससे सारा बोझ आम आदमी पर पड़ने लगा। अब स्थिति यह है कि पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल पर सबसे ज्यादा कर हमारे देश में लिया जा रहा है।

कच्चे तेल से पेट्रोल-डीजल तक उपभोक्ता के पास पहुंचने की प्रक्रिया में कई स्तर पर मुनाफा जोड़ा जाता है। कच्चा तेल रिफाइनरी में जाता है, जहां से पेट्रोल और डीजल निकाला जाता है। इसके बाद ये तेल कंपनियों के पास जाता है। तेल कंपनियां अपना मुनाफा बनाती हैं और पेट्रोल पंप तक पहुंचाती हैं। पेट्रोल पंप का मालिक अपना कमीशन जोड़ता है। कमीशन तेल कंपनियां ही तय करती हैं। उसके बाद केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से जो कर तय होता है, वो जोड़ा जाता है।

केंद्रीय कर से कीमत में बढ़ोतरी

पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का बड़ा कारण है, उस पर सरकारों की तरफ से लगने वाला कर। केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क लगाती है। इसी साल मई में केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क बढ़ाया था।

इस समय एक लीटर पेट्रोल पर 32.98 रुपए और डीजल पर 31.83 रुपए उत्पाद शुल्क लगता है। जब मई 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आई थी, तब एक लीटर पेट्रोल पर 9.48 रुपए और डीजल पर 3.56 रुपए उत्पाद शुल्क लगता था। मई 2014 में एनडीए सरकार आने के बाद से अब तक 13 बार उत्पाद शुल्क बढ़ चुका है। घटा है सिर्फ तीन बार।

राज्यों का कर ढांचा क्या है

केंद्र सरकार के उत्पाद शुल्क के अलावा अब राज्य सरकारें भी वैट यानी मूल्य वर्धित कर और विक्रय कर लगाकर कमाती हैं। पूरे देश में सबसे ज्यादा वैट/विक्रय कर राजस्थान सरकार वसूलती है।

यहां 38 फीसद कर पेट्रोल पर और 28 फीसद डीजल पर लगता है। उसके बाद मणिपुर, तेलंगाना और कर्नाटक हैं, जहां पेट्रोल पर 35 फीसद या उससे अधिक कर लगता है। मध्य प्रदेश में पेट्रोल पर 33 फीसद वैट लगता है।

दरअसल, जब पेट्रोल-डीजल किसी पेट्रोल पंप पर पहुंचता है तो वह पेट्रोल पंप किसी तेल डिपो से कितना दूर है, उसके हिसाब से उस पर किराया लगता है। इसके कारण शहर बदलने के साथ ये किराया बढ़ता-घटता है। इससे अलग-अलग शहर में भी कीमत में अंतर आ जाता है।

कर और कंपनियों का मुनाफा

हमारे देश में पेट्रोल-डीजल पर दुनिया में सबसे ज्यादा कर वसूला जाता है। इंडियन आॅयल कॉरपोरेशन के मुताबिक, एक दिसंबर को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की आधारभूत कीमत थी 26.34 रुपए, लेकिन वो उपभोक्ता को मिला 82.34 रुपए में। यानी 68 फीसद कर लग गया।

इसी तरह डीजल की आधारभूत कीमत थी 27.08 रुपए और कर लगने के बाद कीमत हो गई 72.42 रुपए। यानी, डीजल पर 63 फीसद कर। मध्य प्रदेश, राजस्थान में पेट्रोल पर कुल कर 70 फीसद से भी ज्यादा है। अभी कुछ-कुछ शहरों में पेट्रोल की कीमत 90 रुपए से ज्यादा की है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ही एक लीटर पेट्रोल की कीमत 91.59 रुपए है। इस साल सितंबर तिमाही में सरकार को 18,741 करोड़ रुपए की उत्पाद शुल्क मिला। देश की तीन सबसे बड़ी तेल कंपनियों ने करीब 11 हजार करोड़ का मुनाफा कमाया।
देश की सब

क्या कहते
हैं जानकार

जरूरत इस बात की है कि भारत धीरे-धीरे फॉसिल ऊर्जा के विकल्पों की ओर मुड़े। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें तय होने के नीतिगत कारण हैं।
तरुण कपूर, पेट्रोलियम सचिव (इंडियन आॅयल और लांजाटेक के एक सेमिनार में)

केंद्र सरकार 2014 से 2020 तक 13 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ा चुकी है। छह साल में पेट्रोल पर 335 फीसद और डीजल पर 879 फीसद उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी हुई है।
– एमएम कुट्टी, पूर्व पेट्रोलियम सचिव

ऐसे बढ़ा उत्पाद शुल्क

एक अप्रैल 2014 : पेट्रोल- 9.84 और डीजल- 3.56 फीसद

दो जनवरी 2015 : पेट्रोल- 15.40 और डीजल- 8.20 फीसद

दो जनवरी 2016 : पेट्रोल- 19.73 और डीजल – 13.83 फीसद

चार अक्तूबर 2017 : पेट्रोल- 19.48 और डीजल – 15.33 फीसद

दो फरवरी 2018 : पेट्रोल- 17.48 और डीजल – 13.33 फीसद

छह जुलाई 2019 : पेट्रोल- 17.98 और डीजल – 13.83 फीसद

छह मई 2020 : पेट्रोल- 32.98 और डीजल – 31.83 फीसद

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