उधर, सरकार बार-बार संकेत दे रही है कि नए कानून निरस्त नहीं किए जाएंगे। हां, इनमें किसानों की मांगों के मुताबिक संशोधन जरूर किया जा सकता है। भारतीय किसान यूनियन के सदस्य किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की दिन भर चली बैठक में कोई हल नहीं निकला।

बैठक के बाद किसानों ने आंदोलन को और तेज करने का एलान किया। दूसरी ओर तोमर ने कहा, ‘सरकार वास्तविक किसान संगठनों के साथ बातचीत जारी रखने की पक्षधर है। न्यूनतम समर्थन मूल्य एक प्रशासनिक निर्णय है और यह जस का तस बना रहेगा। देश के विभिन्न राज्यों में कृषि कानूनों का स्वागत किया गया है।’

किसानों ने अपना आंदोलन तेज करने की योजना के बारे में जानकारी दी और कहा कि बुधवार को दिल्ली-नोएडा के बीच चिल्ला बॉर्डर को पूरी तरह अवरुद्ध किया जाएगा। आपातकालीन सेवाओं को भी रोका जाएगा। किसान नेता जगजीत डल्लेवाल ने कहा, ‘सरकार कह रही है कि वह इन कानूनों को वापस नहीं लेगी, हम कह रहे हैं कि हम आपसे ऐसा करवाएंगे।’ उन्होंने कहा, ‘लड़ाई उस चरण में पहुंच गई है, जहां हम मामले को जीतने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

हम बातचीत से नहीं भाग रहे हैं, लेकिन सरकार को हमारी मांगों पर ध्यान देना होगा और ठोस प्रस्ताव के साथ आना होगा।’ किसान नेताओं ने लोगों से आह्वान किया कि 20 दिसंबर को उन किसानों को श्रद्धांजलि दें, जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान अपनी जान गंवा दी।

किसान नेता ऋषिपाल ने कहा कि नवंबर के अंतिम हफ्ते में प्रदर्शन शुरू होने के बाद रोजाना औसतन एक किसान की मौत हुई है। अपना जीवन गंवाने और शहीद होने वाले किसानों के लिए 20 दिसंबर को सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक देश के सभी गांवों और तहसील मुख्यालयों में श्रद्धांजलि दिवस का आयोजन किया जाएगा।

दूसरी तरफ केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों के साथ बैठक के बाद कहा, ‘सरकार वास्तविक किसान संगठनों के साथ बातचीत जारी रखने की पक्षधर है। न्यूनतम समर्थन मूल्य एक प्रशासनिक निर्णय है और यह जस का तस बना रहेगा। देश के विभिन्न राज्यों में कृषि कानूनों का स्वागत किया गया है।’

भारतीय किसान यूनियन के सदस्यों ने कृषि भवन में कृषि मंत्री तोमर से मुलाकात की। इसकी जानकारी देते हुए तोमर ने दावा किया, ‘आज यूपी से आए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय और प्रादेशिक पदाधिकारियों से बातचीत की। उन्होंने तीनों कृषि सुधार कानूनों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि हम कानूनों और सरकार के साथ हैं। इन कानूनों की जरूरत लंबे समय से थी।’

भाजपा है असली टुकड़े-टुकड़े गैंग : सुखबीर

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने किसानों के प्रदर्शन को लेकर भाजपा पर तीखा हमला करते हुए मंगलवार को अपनी पूर्व सहयोगी पार्टी को ‘असली टुकड़े टुकड़े गैंग’ करार दिया और आरोप लगाया कि उसने पंजाब में हिंदुओं को सिखों के खिलाफ कर दिया है।

बादल ने कहा कि भाजपा ने पहले हिंदुओं को मुसलमानों के खिलाफ किया और यह पार्टी सबसे शक्तिशाली विभाजनकारी शक्ति बन गई है, जो पंजाब में अपने खराब खेल को अंजाम देना चाहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा को कृषि संबंधी कानूनों पर ‘अहंकारी रवैया’ छोड़कर किसानों की बात मान लेनी चाहिए। उन्होंने भाजपा को चेतावनी भरे अंदाज में हिंदुओं को सिखों के खिलाफ करने से बचने को कहा। उन्होंने कहा कि अगर कोई केंद्र सरकार के पक्ष में बोलता है तो उसे ‘देश भक्त’ कहा जाता है और यदि वह उसके खिलाफ बोलता है तो उसे ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ कहा जाता है।

बादल ने अपने ट्वीट में आरोप लगाया, ‘देश में भाजपा असली टुकड़े- टुकड़े गैंग है। उसने देश की एकता को टुकड़ों में बांट दिया है, बेशर्मी से हिंदुओं को मुसलिमों के खिलाफ उकसा रही है और अब हताशापूर्ण तरीके से शांतिप्रिय पंजाबी हिंदुओं को उनके सिख भाइयों, खासकर किसानों, के खिलाफ कर रही है।

वे देशभक्त पंजाब को सांप्रदायिकता की आग में धकेल रहे हैं।’अकाली दल ने संसद से पारित कृषि विधेयकों के विरोध में केंद्र में सत्तारूढ़ राजग से नाता तोड़ लिया था। अकाली दल की नेता और सुखबीर सिंह बादल की पत्नी हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।

बादल ने आरोप लगाया, ‘वह सत्ता के लिए इतनी हताश है कि उसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का रास्ता अपनाने और देश को सांप्रदायिक आग में धकेलने में भी संकोच नहीं है।’ अकाली दल अध्यक्ष ने कहा, ‘भाजपा को छोड़कर पूरा देश कृतज्ञता के साथ हमारे देशभक्त किसानों और जवानों के हमारे ऊपर ऋण को मानता है। भाजपा लोगों को उस ऋण को नहीं मानने के लिए उकसा रही है। वह केवल किसानों के बलिदान को भावनात्मक तरीके से भुनाने में भरोसा रखती है लेकिन उनके प्रति इतनी कृतघ्न हो गई है कि उन्हें राष्ट्र-विरोधी कह रही है।’

कुंडली बॉर्डर पर दिल का दौरा पड़ने से किसान की मौत

कुंडली बॉर्डर पर केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन में एक किसान की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। कुंडली थाना पुलिस ने किसान के शव को पोस्टमार्टम के बाद उसके साथी किसानों को सौंप दिया। किसान नेताओं ने उन्हें शहीद करार दिया है।

पंजाब के मोगा जिले के गांव भिंडर कलां के निवासी मक्खन खान (42) अपने साथी बलकार व अन्य के साथ तीन दिन पहले कुंडली बॉर्डर पर किसान आंदोलन में शामिल होने आए थे। गुरिंद्र सिंह ने बताया कि खान लंगर में सेवा करने के लिए आए थे। सोमवार को उनके सीने में दर्द हुआ और अस्पताल ले जाने के दौरान उनकी मौत हो गई।

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