दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर किसान


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, साहिबाबाद
Updated Wed, 16 Dec 2020 12:51 AM IST

दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर किसान
– फोटो : amar ujala

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किसान आंदोलन के मंगलवार को 20 दिन हो गए। यूपी गेट पर किसानों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। प्रदेश के विभिन्न जिलों और उत्तराखंड से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली से यहां पहुंच रहे हैं। किसानों के कई जत्थे रास्ते में हैं। किसानों ने यूपी गेट पर पूरा गांव बसा लिया है। यहां जरूरत के हर समान की व्यवस्था है। 

मंगलवार को दो दर्जन से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में किसान यूपी गेट पर पहुंचे। कासगंज, शाहजहांपुर, गजरौला, इटावा, बांदा, पीलीभीत और उधमपुर से किसान पहुंच रहे हैं। यूपी गेट पर फ्लाईओवर से लेकर हिंडन नहर पुल तक सड़क के दोनों तरफ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लाइन लग गई है। किसानों ने यूपी गेट को गांव का रूप दे दिया है। फ्लाईओवर के नीचे झोपड़ी बना ली है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को भी झोपड़ी का रूप दिया है। जिसमें सोने की व्यवस्था की गई है। कई जगह पर किसान तंबू लगाकर एक साथ रह रहे हैं। मनोरंजन के लिए कई किसानों ने टीवी की भी व्यवस्था की है। 

उधर, किसान संगठन के नेता भी लगातार किसानों से यूपी गेट पर जुटने का आह्वान कर रहे हैं। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी रविवार को किसानों से आह्वान किया था कि सोमवार को जिला मुख्यालय घेरने के बाद किसान यूपी गेट पर पहुंचें। सोमवार शाम से लगातार किसानों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई है।

लगे हैं एक दर्जन से अधिक लंगर
यहां पर एक दर्जन से अधिक जगहों पर भोजन तैयार होता है। सुबह से लेकर रात तक खाने की व्यवस्था की जाती है। किसानों के लिए तरह-तरह के पकवान तैयार होते हैं। बढ़ती ठंड को देखते हुए देर रात तक किसानों के लिए चाय की व्यवस्था रहती है। बीमार किसानों के लिए कई अस्पताल मेडिकल सेवा भी मुहैया करा रहे हैं। 

रास्ते में फंसे हैं किसान
किसान नेताओं की मानें तो किसान गांव से अपना सामान लेकर निकल चुके हैं और ट्रैक्टर-ट्रॉली से यूपी गेट की तरफ बढ़ रहे हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन की तरफ से किसानों को रोका जा रहा है। किसान नेताओं ने कह दिया है कि जहां भी किसानों को रोका जाएगा, किसान साथी वहीं पर धरने पर बैठ जाएं। 

सज गईं हैं दुकानें
शुरू में यहां फेरी वाले हाथ में सामान लेकर बेचने पहुंच रहे थे, पर अब गेट पर दुकानें सज गई हैं। यहां जवाहर कोट, कुर्ता-पायजामा, किसान टोपी और लिहाफ बेहद कम दामों में मिल जाएंगे। किसानों की जरूरत के सामान की दुकानें लगाने वाले अलीगढ़, मथुरा और कानपुर से आए हैं। सामान बेच रहे लोगों का कहना है कि वह यहां कम दाम में भी सामान बेचकर खुश हैं, क्योंकि वह यहां मुनाफा कमाने नहीं, किसानों को समर्थन देने आए हैं। टोपी और जवाहर कोट के साथ कुर्ता खरीदने के लिए दुकानों पर भीड़ जुट रही है।

किसान आंदोलन के मंगलवार को 20 दिन हो गए। यूपी गेट पर किसानों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। प्रदेश के विभिन्न जिलों और उत्तराखंड से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली से यहां पहुंच रहे हैं। किसानों के कई जत्थे रास्ते में हैं। किसानों ने यूपी गेट पर पूरा गांव बसा लिया है। यहां जरूरत के हर समान की व्यवस्था है। 

मंगलवार को दो दर्जन से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में किसान यूपी गेट पर पहुंचे। कासगंज, शाहजहांपुर, गजरौला, इटावा, बांदा, पीलीभीत और उधमपुर से किसान पहुंच रहे हैं। यूपी गेट पर फ्लाईओवर से लेकर हिंडन नहर पुल तक सड़क के दोनों तरफ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लाइन लग गई है। किसानों ने यूपी गेट को गांव का रूप दे दिया है। फ्लाईओवर के नीचे झोपड़ी बना ली है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को भी झोपड़ी का रूप दिया है। जिसमें सोने की व्यवस्था की गई है। कई जगह पर किसान तंबू लगाकर एक साथ रह रहे हैं। मनोरंजन के लिए कई किसानों ने टीवी की भी व्यवस्था की है। 

उधर, किसान संगठन के नेता भी लगातार किसानों से यूपी गेट पर जुटने का आह्वान कर रहे हैं। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी रविवार को किसानों से आह्वान किया था कि सोमवार को जिला मुख्यालय घेरने के बाद किसान यूपी गेट पर पहुंचें। सोमवार शाम से लगातार किसानों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई है।

लगे हैं एक दर्जन से अधिक लंगर
यहां पर एक दर्जन से अधिक जगहों पर भोजन तैयार होता है। सुबह से लेकर रात तक खाने की व्यवस्था की जाती है। किसानों के लिए तरह-तरह के पकवान तैयार होते हैं। बढ़ती ठंड को देखते हुए देर रात तक किसानों के लिए चाय की व्यवस्था रहती है। बीमार किसानों के लिए कई अस्पताल मेडिकल सेवा भी मुहैया करा रहे हैं। 

रास्ते में फंसे हैं किसान
किसान नेताओं की मानें तो किसान गांव से अपना सामान लेकर निकल चुके हैं और ट्रैक्टर-ट्रॉली से यूपी गेट की तरफ बढ़ रहे हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन की तरफ से किसानों को रोका जा रहा है। किसान नेताओं ने कह दिया है कि जहां भी किसानों को रोका जाएगा, किसान साथी वहीं पर धरने पर बैठ जाएं। 

सज गईं हैं दुकानें
शुरू में यहां फेरी वाले हाथ में सामान लेकर बेचने पहुंच रहे थे, पर अब गेट पर दुकानें सज गई हैं। यहां जवाहर कोट, कुर्ता-पायजामा, किसान टोपी और लिहाफ बेहद कम दामों में मिल जाएंगे। किसानों की जरूरत के सामान की दुकानें लगाने वाले अलीगढ़, मथुरा और कानपुर से आए हैं। सामान बेच रहे लोगों का कहना है कि वह यहां कम दाम में भी सामान बेचकर खुश हैं, क्योंकि वह यहां मुनाफा कमाने नहीं, किसानों को समर्थन देने आए हैं। टोपी और जवाहर कोट के साथ कुर्ता खरीदने के लिए दुकानों पर भीड़ जुट रही है।



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