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लखनऊ/ मथुराएक घंटा पहले

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यूपी की मथुरा जेल से बाहर निकलने के बाद डॉ. कफील खान।

  • भड़काऊ भाषण देने के आरोप में डॉ. कफील सात महीने से ज्यादा समय से जेल में बंद थे
  • अलीगढ़ कलेक्टर ने एनएसए और अन्य धाराओं में कार्रवाई की थी, जिसे हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी बताया

उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता डॉक्टर कफील खान ने जेल से रिहाई के बाद बुधवार को फिर एक बार योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘‘महर्षि वाल्मीकि ने रामायण में कहा था कि राजा को राजधर्म के लिए काम करना चाहिए, लेकिन उत्तर प्रदेश में राजा राजधर्म नहीं निभा रहे हैं, बल्कि बाल हठ कर रहे हैं।’’

डॉ. खान ने आशंका जताई कि योगी सरकार उन्हें किसी दूसरे मामले में फंसा सकती है। उन्होंने कहा कि अब वे बिहार और असम में बाढ़ प्रभावितों की मदद करना चाहते हैं।

एनएसए के तहत मथुरा जेल भेजा गया था

डॉ. खान पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 13 दिसंबर 2019 को भड़काऊ भाषण देने का आरोप था। यूपी पुलिस ने उन्हें जनवरी में मुंबई से गिरफ्तार किया था। बाद में अलीगढ़ कलेक्टर ने नफरत फैलाने के आरोप में उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की। फरवरी में उन्हें फिर गिरफ्तार कर मथुरा जेल भेज दिया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें रिहा किया गया।

डॉ. खान ने कहा- लोगों की प्रार्थनाओं से मैं रिहा हुआ

वकील इरफान गाजी ने बताया कि मथुरा जेल प्रशासन ने डॉ. खान को देर रात रिहा किया। जेल से छूटने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट को धन्यवाद दिया और कहा, ‘‘मैं हमेशा अपने सभी शुभचिंतकों का शुक्रगुजार रहूंगा, जिन्होंने मेरी रिहाई के लिए आवाज उठाई। प्रशासन रिहाई के लिए तैयार नहीं था, लेकिन लोगों की प्रार्थना से मुझे रिहा कर दिया गया।’’

मथुरा जेल से बाहर आने के बाद अपनों के साथ डॉ. कफील खान (बीच में दाढ़ी में)।

मथुरा जेल से बाहर आने के बाद अपनों के साथ डॉ. कफील खान (बीच में दाढ़ी में)।

जिला मजिस्ट्रेट का आदेश तर्कसंगत नहीं
हाईकोर्ट ने रिहाई के आदेश में कहा, ‘‘भाषण पूरा पढ़ने से घृणा या हिंसा को बढ़ावा देने की किसी भी कोशिश का खुलासा नहीं होता है। यह अलीगढ़ शहर की शांति के लिए भी खतरा नहीं है। यह भाषण किसी भी तरह की हिंसा का विरोध करता है। ऐसा लगता है कि जिला मजिस्ट्रेट ने भाषण के कुछ ही हिस्‍से को पढ़ा है और उसी का उल्लेख किया है। भाषण के वास्तविक इरादे को नजरअंदाज किया है।’’

ऑक्सीजन कांड के बाद चर्चा में आए थे
डॉ. कफील गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 2017 में ऑक्सीजन की कमी से कुछ ही दिनों में 60 बच्चों की मौत की घटना को लेकर चर्चा में आए थे। आपात स्थिति में ऑक्सीजन सिलेंडरों की व्यवस्था कर बच्चों की जान बचाने को लेकर डॉ. कफील की प्रशंसा हुई थी। बाद में 9 अन्य डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ उन पर कार्रवाई हुई। विभागीय जांच में डॉ. कफील को क्लीनचिट दी गई थी।

विपक्ष ने कहा था- योगी सरकार के मुंह पर तमाचा
हाईकोर्ट के आदेश को सपा, बसपा और कांग्रेस ने योगी आदित्यनाथ सरकार के मुंह पर तमाचा बताया था। सपा ने कहा, ‘‘डॉ. कफील की रिहाई का आदेश दमनकारी और अत्याचारी सत्ता के मुंह पर करारा तमाचा है। दंभी भूल जाते हैं कि न्यायालय इंसाफ के लिए खुले हैं।’’ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा था, ‘‘उम्मीद है कि यूपी सरकार उन्हें तुरंत रिहा करेगी।’’

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