Delhi's Red Light Area GB Road Update; Read Latest News On Garstin Bastion Road Sex Workers | कुछ ग्राहक आना शुरू हुए हैं, वो डरते हैं तो एनजीओ वाले आदमी ने जो सैनिटाइजर दिए हैं, उससे उनके हाथ साफ कर देते हैं
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नईदिल्ली25 मिनट पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी

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  • लॉकडाउन लगा तो भूखे मरने की नौबत थी इसलिए आधी से ज्यादा सेक्स वर्कर तो कोठी छोड़कर चली गईं
  • देशभर में 110 रेड लाइट एरिया, 28 लाख से ज्यादा सेक्स वर्कर्स, दिल्ली के जीबी रोड पर कोठी नंबर 40 से 71 तक इन्हीं के कोठे हैं

न मास्क, न हैंड सैनिटाइजर न कोरोना का डर। जी हां, दिल्ली की जीबी रोड पर रहने वाली सेक्स वर्कर की माली हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उन्हें कोरोना का भी कोई डर नहीं। वो सिर्फ ग्राहक के इंतजार में हैं। ताकि उन्हें कुछ पैसे मिल सकें। कुछ एनजीओ ने उन्हें हैंड सैनिटाइजर, मास्क, ग्लव्स बांटे थे। लेकिन ये इन चीजों का इस्तेमाल नहीं करतीं। कहती हैं, हमें कोरोना नहीं है। यदि कोई ग्राहक सैनिटाइजर या मास्क मांगता है तो रखे हुए उसे दे देते हैं। पढ़ें जीबी रोड से ये लाइव रिपोर्ट…

जीबी रोड दिल्ली में रेड लाइट एरिया है। यहां सालों से सेर्क्स वर्कर्स धंधा कर रही हैं।

जीबी रोड दिल्ली में रेड लाइट एरिया है। यहां सालों से सेर्क्स वर्कर्स धंधा कर रही हैं।

सुबह के दस बज रहे थे। औरतें एक-एक, दो-दो के जोड़ों में कोठियों के बाहर बैठी थीं। हर आने-जाने वाले को हाथ दिखा रही थीं। ऊपर चलने का बोल रहीं थीं। अधिकतर अधेड़ थीं। कुछ ऊपर खिड़कियों से भी हाथ और आवाज देकर नीचे से निकल रहे लोगों को बुला रहीं थीं। मैं कोठी नंबर 42 के सामने रुका। मेरे ठहरते ही हाथ दिखा रही महिला बोली, चल। मैंने कहा मैं, इंटरव्यू लेने आया हूं। इतना सुनते ही उस महिला के हावभाव बदल गए और उसने मुंह घुमा लिया। मैंने कहा, आप लोगों के हालात जानना है। बोली, उससे क्या होगा। यहां कई आते हैं। लिखते हैं। लेकिन कुछ नहीं होता। मैंने कहा, आप बात तो करिए। तो बोली, ऊपर चले जाओ, वहां बात हो जाएगी।

इस तरह की कोठियों में सेक्स वर्कर्स रहती हैं। उन्हें यहां रहने के लिए कोठी मालिक को कमीशन देना होता है।

इस तरह की कोठियों में सेक्स वर्कर्स रहती हैं। उन्हें यहां रहने के लिए कोठी मालिक को कमीशन देना होता है।

मैंने कदम कोठी की सीढ़ियों की ओर बढ़ाए। उस सीढ़ी पर न रोशनी थी, न हवा। ऐसा लग रहा था किसी गुफा में घुस रहे हैं। चंद कदम चढ़ते ही ऊपर कमरे नजर आए। जहां ग्राहक का इंतजार कर रहीं सेक्स वर्कर बैठीं थीं। पास बुलाने लगीं। मैं कोने मैं बैठी एक बुजुर्ग महिला के पास गया और बताया कि इंटरव्यू लेने आया हूं। आप लोगों की जिंदगी कैसे चल रही है। बुजुर्ग महिला हंसते हुए बोली, भूखे मरने की नौबत है। लॉकडाउन के बाद से ग्राहक आना बंद हो गए। तो कमाई बंद हो गई। अब काम कैसे चल रहा है? इस पर बोली, आतें हैं कुछ लोग। राशन-खाना, चाय बांटकर चले जाते हैं। बुजुर्ग महिला के पास में ही बैठकर मोबाइल चला रही दूसरी महिला बोली, यहां फोटो-वोटो मत लेना। बात कर लो जो करना है बस। आपको कोरोना का डर नहीं लगता? ये पूछने पर बोली, कोरोना यहां नहीं है। हमारे यहां किसी को नहीं निकला। लेकिन इसके कारण ग्राहकों ने जरूर आना बंद कर दिया। पहले दिनभर में पांच-सौ, हजार कमा लेते थे। अब खाली हाथ रहते हैं। इतना कहकर बात कर रही महिला उठकर चली गई। आसपास जो थीं, वो पहले ही कमरे से इधर-उधर जा चुकी थीं।

जीबी रोड पर इस तरह सेक्स वर्कर्स कोठे के बाहर बैठी रहती हैं।

जीबी रोड पर इस तरह सेक्स वर्कर्स कोठे के बाहर बैठी रहती हैं।

यह हाल उस कोठी नंबर 42 का है, जो दिल्ली की जीबी रोड पर है। अजमेरी गेट से लाहोरी गेट के बीच का ये हिस्सा रेड लाइट एरिया कहलाता है। यहां 40 नंबर से लेकर 71 नंबर की कोठियां सेक्स वर्कर्स की है। लॉकडाउन के पहले यहां वेश्याओं की संख्या तीन से चार हजार थी, जो अब हजार पर आ गई है। धंधा बंद होने के चलते कोई अपने गांव चली गई तो कोई किसी दोस्त के साथ है। जो कहीं नहीं जा सकती थीं, वो यहीं हैं। लॉकडाउन में सामाजिक संस्थाएं इन्हें राशन बांट रही थीं। कुछ ने हैंड सैनिटाइर और मास्क भी बांटे।

लॉकडाउन के बाद से सेक्स वर्कर्स की हालत बहुत खराब हो चुकी है।

लॉकडाउन के बाद से सेक्स वर्कर्स की हालत बहुत खराब हो चुकी है।

कुछ ग्राहक आने लगे हैं, वो डरते हैं तो सैनिटाइजर से उनके हाथ साफ कर देते हैं

कोठी नंबर 42 के बाद मैं आगे बढ़ते हुए कोठी नंबर 49 पर पहुंचा। बाहर ही तीन-चार सेक्स वर्कर्स ग्राहक के इंतजार में बैठी थीं। उन्हीं में से एक बानो बोली, अब कुछ-कुछ ग्राहक आना शुरू हुए हैं। यदि वो डरते हैं तो एनजीओ वाले आदमी ने जो हैंड सैनिटाइजर दिए हैं, उससे उनका हाथ साफ कर देते हैं। अप्रैल से जून के बीच तो खूब राशन मिला। एक बार छोटा सिलेंडर भी संस्था वालों ने भरवाकर दिया। लेकिन जुलाई से मदद मिलना बहुत कम हो गई और ग्राहक भी नहीं लौटे। सबसे बड़ी दिक्कत हुई पैसे आने बंद होने से। अब राशन से पेट तो भर सकते हैं लेकिन जीने के लिए पैसा भी तो चाहिए। कई बार राशन पूरा नहीं होता तो हम लोगों के पास मसाले खरीदने के पैसे भी नहीं होते। ठेले वाले ने सब्जियां उधार देना बंद कर दिया। जुलाई से तो बहुत दिक्कत आ रही है क्योंकि पहले जितनी संस्थाएं राशन, खाना बांट रही थीं, अब उतनी नहीं आ रहीं। एक ने तो हमें टोकन दे दिया और बोला कि जल्दी ही राशन मिलेगा और फिर वो आज तक लौटकर आया ही नहीं। हमने उसके नंबर पर फोन लगाया तो उसने बोल दिया ये रॉन्ग नंबर है। सरकार ने आपकी कुछ मदद की? इस पर बोलीं, सरकार कभी यहां झांकने तक नहीं आती। न हमारे पास राशन कार्ड है और न वोटर आईडी। कुछ-कुछ कोठियों में राशन कार्ड है तो उनको राशन मिल जाता है।

खिड़कियों पर नजर आ रहीं सेक्स वर्कर्स लेकिन वे अपने फोटो नहीं लेने देतीं। कहती हैं, हमारे परिवार के लोगों ने देखा तो उन्हें अच्छा नहीं लगेगा।

खिड़कियों पर नजर आ रहीं सेक्स वर्कर्स लेकिन वे अपने फोटो नहीं लेने देतीं। कहती हैं, हमारे परिवार के लोगों ने देखा तो उन्हें अच्छा नहीं लगेगा।

इनमें से कई के बच्चे है, उनको पढ़ाना चाहती हैं, बताया भी नहीं कैसे कमाती हैं

इन सेक्स वर्कर में से अधिकांश के बच्चे हैं, जो बाहर गांव या दूसरे शहरों में पढ़ रहे हैं। ये अपने बच्चों को पढ़ाना-लिखाना चाहती हैं। उन्हें ये भी नहीं बताया कि कैसे पैसा कमा रही हैं। पिछले 50 सालों से सेक्स वर्कर्स के अधिकारों के लिए लड़ रहे भारतीय पतिता उद्धार सभा के अध्यक्ष खैरातीलाल भोला कहते हैं, इनकी इतनी बुरी हालत कभी नहीं हुई। जीबी रोड पर आंधप्रदेश, कनार्टक, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक से लेकर नेपाल और बांग्लादेश तक की वेश्याएं हैं। अब तो यहां नई लड़कियां कम ही रह गईं। अधिकतर अधेड़ हैं। ये नाबालिग होती हैं, तब धंधे में लाई जाती हैं और फिर पूरी जिंदगी इनकी कोठे पर बीतती है। 50-55 के बाद इन्हें कोई नहीं पूछता। एक सेक्स वर्कर की कमाई में पांच से छ लोगों का हिस्सा होता है। इसमें कोठे की मालकिन, दलाल, मैनेजर, पुलिस और मेडिकल वाले शामिल होते हैं। यदि किसी को ग्राहक से 500 रुपए मिले हैं तो उसके पास सौ-सवा सौ रुपए ही बच पाते हैं। बाकी सब बंट जाते हैं।

खैरातीलाल के मुताबिक, देशभर में अभी 1100 रेड लाइट एरिया हैं। करीब 28 लाख सेक्स वर्कर हैं और इनके 54 लाख बच्चे हैं, जो इनसे दूर रहते हैं। कुछ पढ़ते हैं। कुछ मजदूरी करते हैं। लेकिन सरकार इनके लिए कुछ नहीं करती। हम वाराणसी, इलाहाबाद में इनके बच्चों के लिए स्कूल भी चला रहे हैं, ताकि वो पढ़-लिख सकें। लॉकडाउन में बहुत राशन बांटा लेकिन अब तो इनकी हालत ऐसी हो गई है कि, दो वक्त का खाना भी बमुश्किल मिल पा रहा है।

नई लड़कियों पर कोठे से निकलने की भी पाबंदी है, कहीं नीचे जाकर भाग न जाएं

जीबी रोड पर धंधा करने वाली अधिकतर सेक्स वर्कर की उम्र 35 से 60 साल के बीच है। नई लड़कियां 500 रुपए लेती हैं। जो अधेड़ हैं, वो सौ-दो सौ रुपए में ही तैयार हो जाती हैं, क्योंकि इनकी कमाई का दूसरा कोई जरिया ही नहीं। खैरातीलाल के मुताबिक, नई लड़कियों को तो कोठे से नीचे आने की परमिशन भी नहीं होती। वो कोठी की मालिकन और दलालों की निगरानी में रहती हैं। डर होता है कि नीचे से कहीं भाग न जाएं। महीनों हो जाते हैं, इन्हें सड़क पर घूमे हुए। सिर्फ खिड़कियों से ही झांकते रहती हैं। जब अधेड़ हो जाती हैं, तब इन्हें बाहर जाने की छूट मिल जाती है, लेकिन फिर ये चाहकर भी कहीं नहीं जा सकतीं।

इन कोठों पर कोरोना वायरस से बचने के कोई इंतजाम नहीं। न किसी ने मास्क लगाया था और न ही हैंड सैनिटाइजर यूज कर रहीं थीं। सुमन बोली, हमारी तो जांच भी हो गई। हम सब नेगेटिव हैं। खैरातीलाल कहते हैं, ये माएं हैं, जिनके चलते सड़क पर निकलने वाली हमारी बहन-बेटियां सलामत हैं। यदि इन्होंने भी यह काम बंद कर दिया तो फिर सड़क पर निकलने वाली महिलाएं कितनी असुरक्षित हो जाएंगी, यह बताने की जरूरत नहीं।

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