Delhi Air Pollution: पढ़ें, 1725 करोड़ रुपये की मशीन पर कैसे भारी है 5 रुपये का यह देशी कैप्सूल
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Delhi Air Pollution: पढ़ें, 1725 करोड़ रुपये की मशीन पर कैसे भारी है 5 रुपये का यह देशी कैप्सूल

हरियाणा, पंजाब में पराली जलाने का सिलसिला शुरू हो चुका है.

दिल्ली सरकार पराली (Parali) से छुटकारा पाने के लिए इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट, पूसा (IARI Pusa) का 5 रुपये कीमत वाला कैप्सूल इस्तेमाल कर रही है. लेकिन पंजाब, हरियाणा (Haryana) और यूपी की सरकारें इस कैप्सूल को लेकर कोई सकरात्मक रुख नहीं दिखा रही हैं.

नई दिल्ली. सर्दियों का मौसम शुरु होते ही दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) और उससे लगे शहरों में प्रदूषण (Pollution) की परेशानी बढ़ जाती है. सबसे ज़्यादा परेशान देश की राजधानी दिल्ली होती है. इस परेशानी के लिए सबसे बड़ा ज़िम्मेदार पंजाब (Punjab), हरियाणा और यूपी (UP) के किसानों को माना गया है. आरोप लगता है कि यह खेत में फसल के अवशेष (पराली) जलाते हैं. हालांकि इससे निजात दिलाने के लिए केन्द्र सरकार अब तक 17 सौ करोड़ से ज़्यादा खर्च कर चुकी है.

लेकिन परेशानी जस की तस है. वहीं इसी साल से दिल्ली सरकार (Delhi Government) पराली (Parali) से छुटकारा पाने के लिए इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट, पूसा (IARI Pusa) का 5 रुपये कीमत वाला कैप्सूल इस्तेमाल कर रही है. लेकिन पंजाब, हरियाणा (Haryana) और यूपी की सरकारें इस कैप्सूल को लेकर कोई सकरात्मक रुख नहीं दिखा रही हैं.

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हर साल खरीदी जा रही हैं 550 करोड़ से ज़्यादा की मशीनेंमशीन से फसले काटने के बाद खेत में पराली बच जाती है. अगली फसल की तैयारी करने से पहल खेत साफ करने के लिए किसान इस पराली को जला देता है. पंजाब, हरियाणा और यूपी में जलने वाली पराली का धुआं दिल्ली में भी आता है. कई साल से दिल्ली चैम्बर बन जा रही है. केन्द्र सरकार ने पराली को भी काटने के लिए किसानों को रियायत पर मशीन देनी शुरु कर दी. 2018-19 में मशीनों के लिए 584.33 करोड़ रुपये दिए. वहीं 2019-20 में 594.14 करोड़ और 2020-21 में 548.20 करोड़ रुपये दिए गए हैं.

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नजफगढ़ के इस केन्द्र पर पराली को गलाने वाला घोल बनाया जा रहा है. सीएम अरविंद केरीवाल ने आज इसका उद्घाटन किया.

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क्या है पूसा का 5 रुपये का कैप्सूल

आईएआरआई के मुताबिक, इस कैप्सूल की कीमत 5 रुपये है. कैप्‍सूल बनाने में पूसा के वैज्ञानिकों को 15 साल लगे हैं. गरीब से गरीब किसान भी इसे खरीदकर इस्‍तेमाल कर सकता है. यह कैप्सूल पराली को जैविक खाद में बदलने का सबसे आसान और सस्ता तरीका है. एक एकड़ जमीन में लगी पराली को जैविक खाद में बदलने के लिए सिर्फ 4 कैप्सूल की जरूरत पड़ती है.

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दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर निगाह रखने के लिए यह वॉर रूम बनाया गया है.

यानी महज 20 रुपये में कोई भी किसान एक एकड़ कृषि भूमि में खड़ी पराली को आसानी से कंपोस्ट में बदल सकता है. पूसा के वैज्ञानिकों ने बताया है कि इस कैप्सूल के इस्‍तेमाल से कृषि भूमि पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है. इस कैप्‍सूल के इस्‍तेमाल से एक तो कृषि भूमि ज्‍यादा उपजाऊ होगी वहीं वायु प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलेगी.





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