कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने किसानों के आंदोलन को लेकर सरकार पर उदासनी और जिद्दी होने का आरोप लगाया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने ट्विटर पर लिखा “मोदी सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने और क्रूर व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के जिद की वजह से अब तक 60 से ज्यादा किसानों की जानें जा चुकी हैं, लेकिन सरकार टस से मस नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों का आंसू पोंछने के बजाए उन पर आंसू गैस के गोले छोड़ रही है। कहा कि सरकार इतनी क्रूरता केवल क्रोनी कैपिटलिस्ट को बढ़ाने और उनके हितों का ध्यान रखने के लिए कर रही है। खेत विरोधी कानून खत्म करें।”

इससे पहले राहुल गांधी ने कहा था, “खेती के तीनों कानून देश के प्रत्येक किसान की आत्मा पर हमला है। ये उनके खून-पसीने पर हमला है। कुछ दिन पहले पंजाब और हरियाणा गया था और हर किसान और मजदूर जानता है कि ये तीनों कानून उन पर हमला है।”

कांग्रेस नेता राहुल गांधाी ने हाल ही में कहा था कि खेती कानून के विरोध में किसानों का आंदोलन ब्रिटिश काल में 1917 में हुए चंपारण आंदोलन जैसा है। कहा कि वर्तमान आंदोलन में शामिल हर किसान और मजदूर ‘सत्याग्रही’ है और वे अपने अधिकार लेकर रहेंगे। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कॉरपोरेट को ‘कंपनी बहादुर’ की संज्ञा दी। उन्होंने हिंदी में ट्वीट कर आरोप लगाया, “देश एक बार फिर चंपारन जैसी त्रासदी झेलने जा रहा है। तब अंग्रेज कम्पनी बहादुर था, अब मोदी-मित्र कम्पनी बहादुर हैं। लेकिन आंदोलन का हर एक किसान-मज़दूर सत्याग्रही है जो अपना अधिकार लेकर ही रहेगा।”

उधर, कांग्रेस पार्टी ने केंद्र पर आरोप लगाया है कि किसान मर रहे हैं और सरकार अपने मित्रों को लाभ पहुंचाने में जुटी हुई है। पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कहा, “एक तरफ प्रदर्शनकारी किसानों की दुर्दशा और उनकी मांगों के प्रति सरकार असंवेदशील बनी हुई है तो दूसरी तरफ भाजपा सरकार के करीबी दोस्तों को व्यापार के सभी क्षेत्रों में अपना प्रभुत्व बढ़ाने के लिए पूरी सहानुभूति और आशीर्वाद प्राप्त मिल रहा है।”

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