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श्रीनगर43 मिनट पहलेलेखक: मुदस्सिर कुलू

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जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) से लगे गांवों में पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी के बाद से ही दहशत है। लोग डरे-सहमे हैं। वह है पाकिस्तानी सेना की शुक्रवार को बिना किसी कारण के की गई गोलीबारी। इसमें भारत के 4 सैनिक शहीद हुए थे और 8 साल के एक बच्चे समेत 6 नागरिक मारे गए थे। दीवाली से ठीक पहले हुई गोलीबारी में इन गांवों में भारी नुकसान हुआ। 5 बच्चों ने अपनी मां को खो दिया। मरने वालों में 8 साल का एक लड़का भी है। एक युवक ने अपने दोनों पैर गंवा दिए। कई घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना के 8 जवान मारे गए थे। हालांकि अब इन गांवों में गोलाबारी बंद है। लेकिन LoC पर तनाव की स्थिति बनी हुई है।

बारामूला सबसे ज्यादा प्रभावित
बारामूला जिले के उड़ी सेक्टर के LoC से लगे सबसे ज्यादा प्रभावित गांव हाजीपीर, बटकोटे, कमलकोटे, चीची, माया, लाचीपोरा, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिले के गोहलान, तुलैल, बाग्तोरे, गुरेज गांव हैं। इन गांवों को पाकिस्तानी सेना ने गोलीबारी करने के साथ ही भारी मोर्टार से गोले दागे थे। इसमें 30 साल की महिला फारूक बेगम की मौत हो गई थी। बालकोटे गांव में फारूक बेगम के घर में एक मोर्टार शेल अंदर गिरा था।

बेगम के पति फारूक अहमद पत्नी की मौत से सदमे में हैं। उनकी तीन बेटियों समेत 5 बच्चे हैं। सबसे छोटा बच्चा बेटी रुतबा जान 16 महीने की है, जो इस बात से अनजान है कि उसकी मां की मौत हो चुकी है। फफकते हुए फारूक ने उस मंजर को याद करते हुए बताया- ‘गोलाबारी सुबह 11 बजे शुरू हुई। उस समय हम घर में बैठे थे। तभी कई गोले घर के अंदर गिरे। एक गोला मेरी पत्नी के ऊपर गिरा और वह मौके पर ही मर गई। इसके बाद दिन भर धमाकों और साइरन की आवाजें रहीं। इस कारण अपनी पत्नी को दफनाने के लिए रात 9 बजे तक करीब 10 घंटे इंतजार करना पड़ा।’

‘गोलाबारी ने किसी को नहीं बख्शा’
पेशे से मजदूर अहमद को अब यह चिंता सता रही है कि छोटे-छोटे बच्चों की परिवरिश वे कैसे करेंगे। उन्हें सरकार की ओर से मिलने वाले राहत का इंतजार हैं। गोहालन में 8 साल के लड़के अफरार अहमद की मौत स्प्लिंटर्स की चपेट में आने से हो गई। ग्रामीण कैसर ने कहा- ‘यहां सभी का नुकसान हुआ है। गोलाबारी ने किसी को भी नहीं बख्शा। महिला, बच्चे, युवा मारे गए या घायल हो गए।’

कोई सरकारी बिल्डिंगों में छिपा तो कोई रिश्तदारों के घर रहा
उड़ी के कमलकोटे इलाके से सैयद नादिर हुसैन (36) ने अपने दोनों पैर खो दिए हैं। वे पूरी तरह से दिव्यांग हो चुके हैं। गोला उनके पैरों पर ही गिरा था। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया था। कमलकोटे के बशीर अहमद ने कहा कि यह पहली बार है, जब उड़ी के सभी क्षेत्रों में पाकिस्तान के सैनिकों ने इतनी तीव्रता से गोलीबारी की। बशीर ने कहा, ‘शुक्रवार को अंधाधुंध गोलाबारी शुरू हुई और रात 9 बजे तक जारी रही। हर कोई अपनी सुरक्षा के लिए भाग रहा था। हमने घर से दूर सरकारी इमारतों में रात गुजारी।’

तंगधार इलाके में, निवासियों ने शनिवार की रात अपने घरों से दूर गहन ठंड के बीच बिताई। गांव के मोहम्मद सिद्दीकी ने कहा- ‘जब गोलाबारी शुरू हुई, तो हमने अपना घर छोड़ दिया और अपने रिश्तेदार के घर रात बिताई। हम लगातार भय के बीच रहते हैं, क्योंकि यहां युद्ध जैसी स्थिति है। हमें नहीं पता कि गोले फिर कब शुरू होंगे।’

एसडीएम रियाज अहमद ने कहा कि उड़ी उपमंडल में करीब 1.25 लाख लोग रहते हैं। किसी भी सीजफायर उल्लंघन के मामले में सीमावर्ती गांवों के 40 हजार लोग प्रभावित होते हैं। गोलीबारी के बाद लोग दहशत में हैं।



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