हैजा के लक्षण जानें


हैजा या कालरा एक ऐसी संक्रामक बीमारी है जिसका इलाज न होने पर मृत्यु भी हो सकती है. हैजा विब्रियो कोलेरी जीवाणु के कारण होता है, जो दूषित भोजन और पानी से फैलता है. यह गंदे हाथों और नाखूनों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में प्रेषित हो सकता है. इस संक्रामक रोग की वजह से गंभीर दस्त की समस्या हो सकती है, जिससे डिहाइड्रेशन की स्थिति पैदा हो सकती है और समय पर इलाज न होने से मौत भी हो सकती है.

हैजा के लक्षण

हैजा का जोखिम सबसे ज्यादा वहां होता है जहां स्वच्छता पर ध्यान नहीं दिया जाता है. यह भीड़भाड़, अकाल और बाढ़ के क्षेत्रों में महामारी के रूप में फैल सकता है. myUpchar के अनुसार, 80 प्रतिशत मरीजों में हैजा के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं और कई मामलों में यह बीमारी अपने आप ठीक हो जाती है. इसके बावजूद मरीज जीवाणु फैला सकता है. शेष 20 प्रतिशत लोगों को तेज दस्त, उल्टी और पैर में ऐंठन की समस्या हो सकती है. अन्य लक्षणों में हृदय गति बढ़ना, ज्यादा प्यास लगना, ब्लड प्रेशर कम होना, त्वचा का लचीलापन कम होना आदि शामिल है.

इन कारणों से होता है हैजादूषित पानी पीने, दूषित पानी से बनी बर्फ का इस्तेमाल करने, सड़क पर बेचे जाने वाले दूषित खाद्य पदार्थों का सेवन करने, मानव अपशिष्टों युक्त पानी से उगाई सब्जियों को बिना धुले खाने से हैजा की समस्या हो सकती है. खास बात यह है कि जब लोग हैजा जीवाणुओं का उपभोग करते हैं, तो वे खुद बीमार नहीं होते हैं, लेकिन अपने मल से जीवाणु फैला सकते हैं. खुले में शौच करने से मानव मल पानी और भोजन के स्रोतों को दूषित करता है. जब कोई व्यक्ति इस दूषित भोजन या पानी का सेवन करता है, तो उसमें हैजा के जीवाणु आंतों में विष छोड़ते हैं, जिसकी वजह से गंभीर दस्त की समस्या हो जाती है.

निदान का केवल एक तरीका

मल के नमूने में जीवाणु की पहचान करना ही इसके निदान का एकमात्र तरीका है. निदान के लिए ‘रैपिड कालरा डिपस्टिक टेस्ट’ किया जाता है, जिसमें 2 से 15 मिनट का समय लग सकता है. इसमें मल के नमूने में एक डिपस्टिक पट्टी डाली जाती है और उसमें बनी पंक्तियों को जांचा जाता है. अगर लाल रेखाएं डिपस्टिक पर दिखती हैं तो यह हैजा का संकेत है.

जल्द से जल्द करें उपचार

हैजा का उपचार जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए, क्योंकि इस बीमारी के कारण मरीज की घंटों में मौत हो सकती है. उपचार का लक्ष्य उल्टी और दस्त के कारण हुई पानी की कमी और शारीरिक लवण के नुकसान की पूर्ति करना है. इसके लिए रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन जैसे ओआरएस का इस्तेमाल किया जाता है. इंट्रावीनस फ्लूइड्स यानी तरल पदार्थों को नसों के जरिए शरीर में पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है.

अपनाएं घरेलू उपाय

myUpchar के अनुसार, खाने-पीने की आदतों में बदलाव, संयम और नियमितता लाकर हैजा से बचा जा सकता है. कुछ घरेलू नुस्खे काम आ सकते हैं जैसे खीरे की पत्तियां, नारियल पानी, नींबू, छाछ, अदरक, पुदीने का जूस, हल्दी, मेथी के बीज आदि का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, हैजा पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।





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