जानिए हाई ट्राइग्लिसराइड्स बीमारी के बारे में, मोटापे से क्या है इसका संबंध (फोटो सौ. AFP)


ट्राइग्लिसराइड्स खून में पाए जाने वाला एक प्रकार का वसा (लिपिड) है. हालांकि कोलेस्ट्रॉल भी एक प्रकार का वसा है, लेकिन ट्राइग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रॉल में अंतर है. अच्छे स्वास्थ्य के लिए इसकी मात्रा सामान्य होना जरूरी है. शरीर के कैलोरी जलाने से अधिक वसा खाने से ट्राइग्लिसराइड का स्तर उच्च हो सकता है.

myUpchar के अनुसार, यदि नियमित रूप से कैलोरी बर्न करने की अपेक्षा भोजन में कैलोरी की मात्रा अधिक लेते हैं, तो ऐसे में कार्बोहाइड्रेट और वसा से हाई हाइट्राइग्लिसराइड की समस्या हो सकती है.

हाई ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर धमनियों को सख्त कर सकता है, जिससे स्ट्रोक, दिल का दौरा और हृदय रोग का जोखिम बढ़ जाता है. यह मेटाबॉलिक सिंड्रोम का हिस्सा हो सकता है, जिसमें कमर के आसपास बहुत अधिक चर्बी, हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर असामान्य होना शामिल है. कभी-कभी हाई ट्राइग्लिसराइड का मतलब टाइप 2 डायबिटीज का अनियंत्रित होना, थायराइड हार्मोन का स्तर कम होना (हाइपोथायरायडिज्म), लिवर या किडनी की बीमारी से भी हो सकता है.

ये है कारण और लक्षणइसके कारणों में मोटापा, बहुत अधिक अस्वास्थ्यकर भोजन, आनुवांशिकता, कुछ बीमारियां जैसे डायबिटीज, किडनी की बीमारी और अंडरएक्टिव थायरॉयड (हाइपोथायरायडिज्म) शामिल हैं. कुछ दवाएं जैसे कि स्टेरॉयड और गर्भनिरोधक गोलियां और बहुत अधिक शराब पीने से भी यह हो सकता है. हाई ट्राइग्लिसराइड्स में आमतौर पर लक्षण नहीं दिखते हैं. अगर हाई ट्राइग्लिसराइड्स आनुवंशिक स्थिति के कारण होता है, तो त्वचा के नीचे फैटी डिपॉडिट्स देखाई दे सकते हैं.

ऐसे होता है निदान

निदान के लिए खून का स्तर मापा जाता है. सामान्य स्तर डेसीलीटर (मिलीग्राम / डीएल) प्रति 150 मिलीग्राम से नीचे होता है. उच्च स्तर 200 से 499 होता है जबकि बहुत उच्च स्तर 500 या उससे ऊपर है.

ये है इलाज

ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने के सबसे बढ़िया तरीकों में वजन कम करना, लो कैलोरी लेना और नियमित रूप से व्यायाम करना शामिल है. आहार में उचित बदलाव करने से वसा और चीनी और रिफाइंड फूड्स से बचने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा शराब और सीमित वसा वाले मीट में पाए जाने वाले सैचुरेटेड फैट, अंडे की जर्दी और मलाई वाले दूध से बने उत्पादों के सेवन से बचें. तले हुए खाद्य पदार्थ और बेक्ड प्रोडक्ट्स में पाए जाने वाले ट्रांस वसा अस्वास्थ्यकर होते हैं इसकी जगह स्वस्थ मोनोअनसैचुरेटेड वसा जैसे जैतून, मूंगफली और कैनोला तेलों का सेवन करें. रेड मीट की बजाय ओमेगा -3 फैटी एसिड से युक्त खाद्य पदार्थों जैसे मैकेरल, सैल्मन मछली का सेवन करें.

अगर आहार में बदलाव और व्यायाम काम नहीं करता है तो दवाएं जैसे निकोटिनिक एसिड, फाइब्रेट्स और ओमेगा-3 फैटी एसिड सप्लीमेंट्स ट्रायग्लिसराइड्स को कम करने में मदद कर सकते हैं. डॉक्टर की सलाह के बिना न तो आहार में बदलाव करें और ना ही उनकी सलाह के बिना कोई भी दवाई लें. साथ ही यह भी याद रखें कि डायबिटीज को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है क्योंकि हाई ब्लड शुगर भी ट्राइग्लिसराइड्स को बढ़ाएगा. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, हाई ट्राइग्लिसराइड्स पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।





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