फरवरी से मार्च के बीच इस महाभारत का मंचन होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

टीवी पर प्रसारित हुए महाभारत सीरियल में धृतराष्ट्र का रोल निभाने वाले गिरिजा शंकर ने हामी भर दी है, जबकि द्रोणाचार्य का रोल सुरेन्द्र पाल करेंगे. सुरेन्द्र पाल ने ही टीवी पर प्रसारित महाभारत में द्रोणाचार्य का रोल प्ले किया था.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    December 10, 2020, 9:20 PM IST

मेरठ. अर्जुन के गांडीव की टंकार, कर्ण के कवच कुंडल, भीष्म की प्रतिज्ञा, पुरुषार्थ, स्वार्थ और परमार्थ की कथा महाभारत को देश दुनिया के लोग फिर से जीवंत देख सकेंगे. मेरठ से चालीस किलोमीटर दूर हस्तिनापुर में महाभारत के इतिहास को फिर से दोहराया जाएगा. यहां देश और प्रदेश के थिएटर कलाकार और बॉलीवुड की हस्तियां नौ दिवसीय आयोजन में महाभारत का मंचन करेंगी. इसके लिए 12 दिसंबर से ऑडिशन शुरू हो रहे हैं. माना जा रहा है अगले साल फरवरी से मार्च के बीच इस महाभारत का मंचन होगा. आयोजनकर्ताओं का कहना है कि हस्तिनापुर की धरती पर होने वाली इस महाभारत को बिल्कुल अयोध्या में हुई रामलीला की तर्ज पर किया जाएगा

श्वेतांबर मंदिर मे होगा मंचन

हस्तिनापुर महाभारत मंचन कमेटी और हस्तिनापुर सांस्कृतिक फाउंडेशन के तत्वावधान में यहां श्वेतांबर मंदिर में मंचन का आयोजन होगा. इसके लिए जोरदार तैयारियां की जा रही हैं. कई कलाकारों को फाइनल कर लिया गया है जबकि कई को ऑडिशन के बाद फाइनल किया जाएगा. टीवी पर प्रसारित हुए महाभारत सीरियल में धृतराष्ट्र का रोल निभाने वाले गिरिजा शंकर ने हामी भर दी है, जबकि द्रोणाचार्य का रोल सुरेन्द्र पाल करेंगे. सुरेन्द्र पाल ने ही टीवी पर प्रसारित महाभारत में द्रोणाचार्य का रोल प्ले किया था. जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर सिंह का कहना है कि कलयुग में महाभारत के मंचन के लिए हर वे प्रयास किए जा रहे हैं कि इसका संदेश ऐतिहासिक हो.

नेपथ्य में होगी ‘मैं हस्तिनापुर हूं’ की आवाजमंचन के दौरान हस्तिनापुर के पांडव मंदिर, द्रौपदी घाट, कर्ण मंदिर, विदुर टीला, उल्टा खेड़ा टीला आदि भी दिखाया जाएगा. आयोजनकर्ताओं ने बताया कि इस महाभारत में ‘मैं समय हूं’ के स्थान पर ‘मैं हस्तिनापुर हूं’ की आवाज आएगी. कलाकार मंचन के साथ-साथ हस्तिनापुर की उपेक्षा को भी जनसामान्य तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे. हस्तिनापुर के विकास संबंधी आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला जाएगा और दर्शकों को महाभारत के सत्य से भी परिचित कराया जाएगा. यानी कह सकते हैं कि एक बार पांडवों की राजधानी रही हस्तिनापुर वही इतिहास दोबारा दोहराएगी.





Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here