प्लाज्मा सेल्स के अंदर होने वाले कैंसर को मल्टीपल माइलोमा कहते हैं.


प्लाज्मा सेल्स इम्यून सिस्टम का हिस्सा होते हैं जो कि आमतौर पर शरीर के बोन मैरो में पाए जाते हैं. इन प्लाज्मा सेल्स के अंदर होने वाले कैंसर को मल्टीपल माइलोमा कहते हैं. इससे पीड़ित व्यक्ति के बोन मैरो में प्लाज्मा सेल्स जमा होने लगते हैं, जिससे रक्त कोशिकाओं का उत्पादन पर असर पड़ता है.

इन्हें हो सकता है जोखिम

इस बीमारी का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन डॉक्टरों ने कुछ ऐसे कारक सुझाए हैं जो कि मल्टीपल माइलोमा के खतरे को बढ़ाते हैं. उनका मानना है कि मोटापा और 35 साल से ज्यादा की उम्र इसके कारणों में शामिल हो सकते हैं. वहीं पुरुषों को महिलाओं की तुलना में इस बीमारी का जोखिम अधिक होता है.

ये भी हो सकता है कारणएक अन्य कारक ऑन्कोजीन्स हैं, जो कि शरीर में कोशिकाओं के विकास के लिए जिम्मेदार होते हैं. जब ऑन्कोजीन्स और ट्यूमर को दबाने वाले जीन्स के बीच असंतुलन होता है तो यह परिस्थिति पैदा हो सकती है. ट्यूमर को दबाने वाले जींस कोशिकाओं के विकास को कम करते हैं. किसी कारणवश इन जीन्स का रूप बदल जाए या फिर इसके काम करने के तरीके में गड़बड़ी हो तो शरीर में प्लाज्मा सेल्स का विकास अनियंत्रित होने लगता है. इससे मल्टीपल माइलोमा हो सकता है.

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

इसके लक्षण शुरुआती चरण में पता नहीं चलते हैं, हालांकि बाद के चरण में कुछ संकेत दिखते हैं जैसे हड्डियों में लगातार दर्द, हड्डियों का कमजोर होना, बार-बार संक्रमण, खून में कैल्शियम की मात्रा बढ़ने से पेट में दर्द, कब्ज, एनीमिया या फिर किडनी का ठीक से काम न कर पाना या किडनी फेल होना.

इस तरह होता है निदान

इन लक्षणों के नजर आने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. वे एक्स-रे, कम्प्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी), यूरिन टेस्ट, सीटी स्कैन, पीईटी स्कैन या एमआईआर आदि करवा सकते हैं. इससे पता चलेगा कि ट्यूमर कहां है और कितना फैल चुका है. बोन मैरो का सैंपल लेने से पता चलेगा कि कैंसर वाली बायोप्सी से मल्टीपल माइलोमा होने की पुष्टि होती है.

कीमोथेरेपी है इलाज, लेकिन दुष्प्रभाव भी

इस बीमारी का सबसे आम इलाज कीमोथेरेपी है. कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने और ट्यूमर को बढ़ने से रोकने के लिए दवाइयां दी जाती है. ये इलाज बहुत अधिक सफल नहीं है क्योंकि इसके दुष्प्रभाव बहुत ज्यादा हैं. कीमोथेरेपी की दवाईयों की संपूरक बनकर उन्हें ज्यादा असरदार बनाने के लिए स्टेरॉयड का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन नींद लेने में परेशानी, अपच, सीने में जलन इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं. मल्टीपल माइलोमा के सेल्स को मारने के लिए थैलिडोमाइड भी मदद करती है, लेकिन इससे भी चक्कर आने, कब्ज जैसी दिक्कतें हो सकती है. इसके अलावा खून का थक्का जमने, सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द की शिकायत भी हो सकती है.

गंभीर मामलों में स्टेम सेल ट्रांसप्लांट

बोन मैरो के टिश्यू को स्वस्थ स्टेम सेल्स में बदलने के लिए गंभीर मामलों में स्टेम सेल ट्रांसप्लांट होता है. हालांकि इसके इलाज में काफी पैसा खर्च हो सकता है और साथ ही दर्द भी झेलना पड़ सकता है. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, मल्टीपल माइलोमा पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।





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