स्किन लाइटनिंग प्रोडक्ट्स से बिगड़ सकता है हॉर्मोनल बैलेंस, जानें कैसे
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यूरोपियन सोसायटी ऑफ इंडोक्रिनोलॉजी में पेश की गई हालिया रिसर्च से यह संकेत मिलता है कि जो महिलाएं कॉर्टिकोस्टेरॉयड आधारित स्किन लाइटनिंग यानी त्वचा की रंगत को हल्का करने वाले उत्पादों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल या दुरुपयोग करती हैं, उनमें अधिवृक्क अपर्याप्तता (ऐड्रिनल इन्सफिशिएंसी) विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है. अधिवृक्क अपर्याप्तता एक ऐसी स्थिति है जिसमें अधिवृक्क ग्रंथियां (किडनी के ऊपर स्थित ग्रंथियों की एक जोड़ी) कोर्टिसोल हार्मोन का पर्याप्त मात्रा में उत्पादान नहीं करती हैं. नतीजतन, व्यक्ति को लो ब्लड प्रेशर, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, चक्कर आना और वजन घटने जैसे लक्षणों का अनुभव होने लगता है.

कोर्टिसोल, शरीर का स्ट्रेस हॉर्मोन है जो फाइट या फ्लाइट प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है. साथ ही यह मेटाबॉलिज्म, इम्यून सिस्टम के फंक्शन और इन्फ्लेमेशन को भी प्रभावित करता है. एक्जिमा, कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस और सोरायसिस आदि स्किन से जुड़ी विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए त्वचा विज्ञान (डर्मेटॉलजी) में टॉपिकल कॉर्टिकोस्टेरॉयड्स का उपयोग किया जाता है. वे इन्फ्लेमेशन (आंतरिक सूजन और जलन) को कम करते हैं और इम्यून सिस्टम को दबाते हैं, जिस कारण स्किन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के लक्षणों से राहत मिलती है.

हालांकि, त्वचा की रंगत हल्का करने वाले एजेंट्स के तौर पर कोर्टिकोस्टेरॉयड्स का हद से ज्यादा इस्तेमाल भी किया जाता है और ये कोर्टिकोस्टेरॉयड्स दुनिया के विभिन्न हिस्सों विशेष रूप से अफ्रीका, एशिया और मध्य पूर्व में काफी लोकप्रिय हैं.क्या कहती है यह नई रिसर्च?
इस अध्ययन के लिए, मिस्र की राजधानी काहिरा स्थित ऐन शम्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के एक समूह ने पिछले 3 महीने से टॉपिकल कोर्टिसोल का इस्तेमाल कर रही 45 महिलाओं की तुलना उन महिलाओं से की जो कॉर्टिकोस्टेरॉयड क्रीम का उपयोग नहीं कर रहीं थीं. अध्ययन में यह पाया गया कि जो महिलाएं अधिक मात्रा में कॉर्टिकोस्टेरॉयड्स युक्त क्रीम का उपयोग कर रही थीं और जो क्रीम का नियमित रूप से कई बार और शरीर के अधिक हिस्सों में उपयोग कर रही थीं, उनके शरीर में कोर्टिसोल का लेवल बेहद कम था. जिन लोगों ने कम स्ट्रेंथ वाली क्रीम का इस्तेमाल किया, उनके शरीर में कोर्टिसोल के लेवल में कोई बड़ा अंतर नहीं दिखा.

इससे पहले हुई रिसर्च
यूरोपियन सोसायटी ऑफ इंडोक्रिनोलॉजी की न्यूज रिलीज के अनुसार, कोर्टिकोस्टेरॉयड का अत्यधिक और लंबे समय तक इस्तेमाल अंततः शरीर के कोर्टिसोल लेवल के अपने ही विनियमन को प्रभावित करता है. हालांकि, अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि ये प्रॉडक्ट्स शरीर में कोर्टिसोल के स्तर को किस हद तक प्रभावित करते हैं. इसके अलावा, यह कोई पहली स्टडी नहीं है जिसमें टॉपिकल कॉर्टिकोस्टेरॉयड के दुरुपयोग और सेहत पर इसके हानिकारक प्रभावों के बारे में बताया गया है.

टॉपिकल कॉर्टिकोस्टेरॉयड का दुरुपयोग पहले भी स्किन से जुड़ी कई समस्याओं और दुष्प्रभावों जैसे- मुंहासे, त्वचा का मोटा होना, पेरिओरल डर्मेटाइटिस, टिनिया इनकॉगनिटो (टिनिया संक्रमण जो टॉपिकल स्टेरॉयड के उपयोग से बिगड़ जाता है), पिगमेंटेशन और सेल्युलाइटिस से जुड़ा रहा है. टॉपिकल स्टेरॉयड-डिपेंडेंट फेस’इस टर्म का इस्तेमाल एक ऐसी स्थिति को परिभाषित करने के लिए किया जाता है, जिसमें कोई व्यक्ति जो लंबे समय से टॉपिकल स्टेरॉयड का उपयोग कर रहा हो, वो जब इसका इस्तेमाल बंद कर देता है तो उसके चेहरे पर गंभीर प्रतिघात देखने को मिलता है जैसे- एरिथेमा या लालिमा, चेहरे पर जलन महसूस होना और स्किन में दरार आना और पपड़ी बनकर स्किन का उतरना आदि.

चूंकि ज्यादातर स्किन लाइटनिंग क्रीम (त्वचा की रंगत निखारने वाली क्रीम) बिना प्रिसक्रिप्शन के ओटीसी सी आसानी से मिल जाती हैं इसलिए ज्यादातर लोग इसके साइड इफेक्ट्स से अनजान होते हैं, इसलिए वे इन क्रीम्स का इस्तेमाल जारी रखते हैं. इस स्टडी के को-ऑथर डॉ हैनी खैरी मंसूर ने कहा, “इन उच्च शक्ति वाले स्टेरॉयड क्रीमों की ओवर-द-काउंटर बिक्री को प्रतिबंधित करना चाहिए इनकी बिक्री सिर्फ डॉक्टर के पर्चे के आधार पर ही होनी चाहिए.”

स्टडी के लेखकों ने यह भी उल्लेख किया कि यह केवल एक छोटा सा अध्ययन है और उच्च-शक्ति कॉर्टिकोस्टेरॉयड के इस्तेमाल और अधिवृक्क अपर्याप्तता जोखिम के बीच क्या संबंध है इसका पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर व्यापक अध्ययन की आवश्यकता है. अध्ययन के लेखक शरीर में कोर्टिसोल के स्तर को खोजने के लिए 24 घंटे के यूरिन टेस्ट का अध्ययन करके अपने निष्कर्षों का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि यूरिन टेस्ट अधिवृक्क ग्रंथि या ऐड्रिनल ग्लैंड के कार्य का एक अहम संकेतक है.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, कोर्टिसोल हार्मोन क्या है, कैसे कार्य करता है के बारे में पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है.  myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.





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