Friday, July 23, 2021
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सौरव गांगुली करते थे मैदान पर ‘दादागीरी’, 4 साल रहना पड़ा टीम से बाहर-Sourav Ganguly Birthday 5 controversy of former captain– News18 Hindi


Happy Birthday Sourav Ganguly: सौरव गांगुली की ‘दादागीरी’ के 5 किस्से (फोटो-सौरव गांगुली इंस्टाग्राम)

पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly Birthday) का आज जन्मदिन है. दादा के नाम से मशहूर गांगुली 49 साल के हो गए हैं. सौरव गांगुली के जन्मदिन पर जानिए उनकी ‘दादागीरी’ के 5 बड़े किस्से

नई दिल्ली. टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और मौजूदा BCCI अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly Birthday) का आज जन्मदिन है. कोलकाता में जन्मे सौरव गांगुली आज 49 साल के हो गए हैं. सौरव गांगुली को उनकी कप्तानी और बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है. मैच फिक्सिंग के जख्म झेलने के बाद जब टीम इंडिया मुश्किल में थी तो उस वक्त सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) को कमान सौंपी गई और अपने करिश्माई व्यक्तित्व के दम पर इस खिलाड़ी ने बेहद मजबूत टीम बनाई. वो सौरव गांगुली ही थे जिन्होंने टीम इंडिया को आक्रामक बनाया और उन्होंने ही टीम को विदेश में जीतने की राह दिखाई. सौरव गांगुली की बल्लेबाजी भी बेमिसाल थी और उन्हें ऑफ साइड का भगवान भी कहा जाता था. गांगुली ने टेस्ट क्रिकेट में 16 और वनडे में 22 शतक जड़े. वनडे क्रिकेट में गांगुली ने 11,363 रन बनाए वहीं टेस्ट में उनके नाम 7212 रन हैं. खेल के अलावा सौरव गांगुली अपनी आक्रामकता के लिए भी जाने जाते थे. गांगुली दूसरे भारतीय खिलाड़ियों से अलग थे और वो ईंट का जवाब पत्थर से देने में यकीन रखते थे. आइए आपको बताते हैं गांगुली की दादागीरी के 5 बड़े किस्से.

सौरव गांगुली की ‘दादागीरी’ इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखते ही शुरू हो गई थी. साल 1992 में सौरव गांगुली को ऑस्ट्रेलियाई दौरे के लिए चुना गया. गांगुली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे डेब्यू किया और वो महज 3 रन बनाकर आउट हुए. गांगुली को इसके बाद सीरीज में मौका नहीं मिला. गांगुली को एक मुकाबले के लिए 12वां खिलाड़ी बनाया गया और उन्हें मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों के लिए ड्रिंक्स ले जाने के लिए कहा गया लेकिन गांगुली ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो गांगुली ने दो टूक जवाब देते हुए कहा- मैं यहां खेलने आया हूं, पानी पिलाने नहीं. गांगुली का ये रवैया किसी को पसंद नहीं आया और अगले चार साल तक उन्हें टीम इंडिया में जगह नहीं मिली.

सौरव गांगुली ने साल 2000 में लंकाशायर के लिए काउंटी क्रिकेट खेला और यहां भी उनकी दादागीरी के किस्से मशहूर हुए. गांगुली पर आरोप लगे कि वो अपने साथी खिलाड़ियों को आदेश देकर अपना काम करवाते थे. लंकाशायर के ही खिलाड़ी और इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक एथर्टन ने खुलासा किया था कि एक बार गांगुली ने उन्हें अपनी स्वेटर देकर मैदान से बाहर जाने को कहा. साथ ही गांगुली पर दूसरे खिलाड़ियों से अपना किट बैग उठवाने का भी आरोप लगा. इंग्लैंड के पूर्व ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने दावा किया कि गांगुली खुद को प्रिंस चार्ल्स समझते थे.

सौरव गांगुली ने कई बार विपक्षी कप्तानों के सामने अपनी दादागीरी दिखाई. सौरव गांगुली पर स्टीव वॉ और नासिर हुसैन को टॉस के लिए इंतजार कराने का आरोप लगे. एक शो में इरफान पठान ने खुलासा किया था कि स्टीव वॉ के आखिरी टेस्ट में भी सौरव गांगुली टॉस के लिए देरी से गए. साल 2001 में भी गांगुली ने स्टीव वॉ को घरेलू टेस्ट सीरीज में टॉस के लिए इंतजार कराया था. नासिर हुसैन ने तो गांगुली की शिकायत तक कर दी थी.

नेटवेस्ट ट्रॉफी का फाइनल किसे याद नहीं होगा. इस मुकाबले को जीतने के बाद सौरव गांगुली ने लॉर्ड्स की बालकनी में अपनी दादागीरी दिखाई थी. गांगुली ने भारत की रोमांचक जीत के बाद अपनी जर्सी उतारकर लहराई थी और साथ ही उन्हें गालियां देते हुए भी सुना गया. कई दिग्गजों ने गांगुली की इस हरकत को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान का अपमान बताया था. हालांकि गांगुली ने जर्सी उतारकर फ्लिंटॉफ को जवाब दिया था जिन्होंने भारत में सीरीज जीतने के बाद ऐसे ही जर्सी उतारी थी.

साल 2004 में सौरव गांगुली ने नागपुर की पिच से नाराज होकर खुद को टीम से बाहर कर लिया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नागपुर टेस्ट से पहले गांगुली ने पिच क्यूरेटर को स्पिनर्स के मुताबिक पिच बनाने के लिए कहा था लेकिन ऐसा हुआ नहीं जिसके बाद गांगुली ने वो मैच ही खेलने से इनकार कर दिया. इस मैच में राहुल द्रविड़ ने कप्तानी की थी.



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