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अनुसंधानकर्ताओं ने सार्स कोव-2 के जीन के भीतर मौजूद जिस जीन की पहचान की है उसे ‘ओआरएफ3डी’ नाम दिया गया है (साकंतेक तस्वीर)

Coronavirus: अब तक कोरोना वायरस के जीनोम में शामिल 15 जीन की पहचान की जा चुकी है जिसका असर इस वायरस के खिलाफ वैक्सीन या दवा को विकसित करने पर पड़ सकता है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 13, 2020, 7:11 AM IST

न्यूयॉर्क. दुनिया भर में कोरोना वायरस (Coronavirsu) का संक्रमण अब तक थमा नहीं है. एक साल बाद भी अब तक इस वायरस से लड़ने के लिए न तो कोई पुख्ता दवाई है न ही कोई वैक्सीन (Corona Vaccine). लेकिन वैज्ञानिक इस वायरस को मात देने के लिए दिन रात रिसर्च कर रहे हैं. इसी कड़ी में अमेरिका के रिसर्चर ने कोरोना वायरस के अब तक अज्ञात रहे जीन (Genes) की पहचान की है. माना जा रहा है कि ये जीन इस वायरस को जैविक प्रतिरोध और महामारी फैलाने की ताकत देता है. दावा किया जा रहा है कि इस कामयाबी के बाद वायरस के खिलाफ इलाज के तरीकों को तलाश करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

वैक्सीन या दवा बनाने में मिलेगी मदद
अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के वैज्ञानिकों सहित अनुसंधानकर्ताओं की टीम के मुताबिक अब तक कोरोना वायरस के जीनोम में शामिल 15 जीन की पहचान की जा चुकी है जिसका असर इस वायरस के खिलाफ वैक्सीन या दवा को विकसित करने पर पड़ सकता है. ताज़ा अध्ययन को जर्नल ई-लाइफ में प्रकाशित किया गया है. यहां वैज्ञानिकों ने वायरस के जीन के भीतर जीन होने का उल्लेख किया है और माना जा रहा है कि ये संक्रमित के शरीर में वायरस की प्रतिकृति बनाने में अहम भूमिका निभाता है.

वायरस  को कंट्रोल किया जा सकता हैअमेरिकन म्युजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री में काम करने वाले और अनुसंधान पत्र के प्रमुख लेखक चेस नेलसन ने कहा, ‘ जीन के भीतर मौजूद ये जीन कोरोना वायरस का एक हथियार हो सकता है जो शायद वायरस को अपनी प्रतिकृति बनाने में मदद करता हो और संक्रमित के प्रतरोधक क्षमता को निशाना बनाता हो. जीन के भीतर जीन की मौजूदगी और उसके कार्य करने के तरीके से कोरोना वायरस को नियंत्रित करने के नए तरीके के लिए रास्ते खुल सकते हैं.’

और क्या पता चला?
अनुसंधानकर्ताओं ने सार्स कोव-2 के जीन के भीतर मौजूद जिस जीन की पहचान की है उसे ‘ओआरएफ3डी’ नाम दिया गया है जिसमें प्रोटीन को उम्मीद से अधिक कार्यप्रणाली निश्चित करने की जानकारी की क्षमता है. उन्होंने बताया कि ओआरएफ3डी पूर्व में खोज किए गए पैंगोलिन कोरोना वायरस में भी मौजूद थे और जो संकेत करता है कि सार्स-कोव्2 और संबंधित वायरस के विकास के दौरान ये जीन विकास के क्रम से गुजरा.

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एंटीबॉडी बनाने में मदद
अध्ययन के मुताबिक ओआरएफ3डी की स्वतंत्र पहचान की गई और पाया गया कि कोविड-19 मरीज में बीमारी से लड़ने के लिए बने एंटीबॉडी के खिलाफ ये मजबूती से काम करता है. इससे ये पता चला कि नए जीन से इंसान में संक्रमण के दौरान नए तरह का प्रोटीन बना. नेल्सन ने कहा, ‘हम अब भी इसकी कार्यप्रणाली या चिकित्सकीय महत्व को नहीं जानते हैं लेकिन पूर्वानुमान लगा सकते हैं कि इस जीन की शायद ही टी- सेल्स पहचान कर पाती है ताकि मुकाबला करने के लिए एंटीबॉडी का उत्पादन कर सके और ये पता लगाना है कि आखिर कैसे जीन खुद को बचाता है.’





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