लालू के करीबी रघुवंश प्रसाद का 74 की उम्र में दिल्ली एम्स में निधन; 3 दिन पहले पार्टी से इस्तीफा दिया था, पर लालू ने स्वीकार नहीं किया
Spread the love


पटनाएक घंटा पहले

  • कॉपी लिंक

रघुवंश प्रसाद सिंह को कुछ दिन पहले कोरोना हुआ था। महामारी ठीक होने के बाद उन्हें फेफड़े की बीमारी ने जकड़ लिया था। -फाइल फोटो

  • रघुवंश जब पटना एम्स में भर्ती थे, तब उन्होंने 23 जून को पार्टी उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, इसे स्वीकार नहीं किया गया
  • रघुवंश ने 10 सितंबर को फिर दिल्ली एम्स से पार्टी छोड़ने का ऐलान किया था, जवाब में लालू कहा कि आप कहीं नहीं जा रहे

राजद नेता और लालू प्रसाद के सबसे करीबी रघुवंश प्रसाद सिंह (74) का रविवार को निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली के एम्स में अंतिम सांस ली। वे पिछले चार दिनों से सांस की तकलीफ से जूझ रहे थे। उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया था। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को वैशाली जिले के पैतृक गांव पानापुर पहेमी में किया जाएगा।

रघुवंश जब पटना एम्स में भर्ती थे, तब उन्होंने 23 जून को पार्टी उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। वे रामा सिंह के राजद में आने की खबरों को लेकर नाराज चल रहे थे। रघुवंश को 18 जून को कोरोना हो गया था। एक जुलाई को उन्हें पटना एम्स से छुट्टी मिल गई थी। रघुवंश 1977 में पहली बार विधायक बने थे। 5 बार सांसद चुने गए।

मोदी ने वर्चुअल रैली में दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जमीन से जुड़ा और गरीबी को समझने वाला नेता चला गया। जिस विचारधारा से जुड़े, उसी को जीवन भर जिया। उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए लगातार चिंता करता था। उम्मीद थी कि वे जल्द ठीक होकर बिहार की सेवा में लग जाएंगे। वे जिन आदर्शों के साथ चल रहे थे, उनके साथ चलना अब संभव नहीं था। उन्होंने इसे प्रकट भी कर दिया था। बिहार के सीएम को राज्य के विकास को लेकर चिट्ठी भेजी। नीतीशजी से आग्रह करूंगा रघुवंश ने आखिरी चिट्ठी में जो भावनाएं प्रकट की हैं, उसे आप और हम मिलकर पूरा करने का निश्चय करें।

लालू ने भी किया ट्वीट

अब आपकी पीठ के पीछे खड़ा नहीं रहूंगा: रघुवंश

10 सितंबर को उन्होंने अस्पताल के बेड से ही राजद प्रमुख लालू यादव को इस्तीफा भेजा था। अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा था कि, ‘‘जन नायक कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद 32 साल तक आपके पीठ पीछे खड़ा रहा, लेकिन अब नहीं। पार्टी, नेता, कार्यकर्ता और आमजन का बड़ा स्नेह मिला, मुझे क्षमा करें।’’

रघुवंश प्रसाद सिंह की लालू को लिखी गई चिट्ठी।

रघुवंश प्रसाद सिंह की लालू को लिखी गई चिट्ठी।

आप कहीं नहीं जा रहे: लालू

लालू प्रसाद यादव रांची की बिरसा मुंडा जेल में हैं। अपने करीबी की नाराजगी की बात पर उन्होंने खुद मोर्चा संभाला। रघुवंश को चिट्ठी लिखी, ‘‘राजद परिवार आपको शीघ्र स्वस्थ होकर अपने बीच देखना चाहता है। चार दशकों में हमने हर राजनीतिक सामाजिक और यहां तक कि पारिवारिक मामलों में भी मिल बैठकर ही विचार किया है। आप जरूर स्वस्थ हों फिर बैठ के बात करेंगे। आप कहीं नहीं जा रहे हैं! समझ लीजिए।’’

लालू की रघुवंश को चिट्ठी।

लालू की रघुवंश को चिट्ठी।

रघुवंश का लालू को जवाब- अब परिवार के ही 5 लोगों की फोटो दिख रही
लालू की चिट्ठी का भी रघुवंश ने जवाब दिया। उन्होंने लिखा, ‘‘वर्तमान में राजनीति में इतनी गिरावट आ गई है, जिससे लोकतंत्र पर खतरा है। कुछ पार्टियों द्वारा सीटों, टिकट की खरीद-बिक्री से कार्यकर्ताओं की हकमारी हो रही है। वोट का राज और वोट प्रणाली ही चौपट जाए तो लोकतंत्र कैसे बचेगा। महात्मा गांधी, बाबू जयप्रकाश नारायण, डॉ. लोहिया, बाबा साहब और जननायक कर्पूरी ठाकुर के नाम और विचारधारा पर लाखों लोग रहे, कठिनाइयां सहीं, लेकिन डगमग नहीं हुए। समाजवाद की जगह सामंतवाद-जातिवाद, वंशवाद, परिवारवाद, संप्रदायवाद आ गया। पांचों महान शख्सियतों की जगह एक ही परिवार के पांच लोगों (लालू, राबड़ी, तेज प्रताप, तेजस्वी और मीसा) का फोटो छपने लगा। लोग पद इसलिए चाहते हैं कि धन कमा सकें।’’

दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार योजना मनरेगा के जनक थे रघुवंश
रघुवंश प्रसाद सिंह को दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार योजना कहलाने वाली मनरेगा का जनक भी कहा जाता है। 2004 में जब केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार बनी तो उसमें रघुवंश प्रसाद केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री थे। सोनिया गांधी की अध्यक्षता में बनी राष्ट्रीय सलाहकार समिति ने रोजगार गारंटी कानून बनाने का प्रस्ताव पास किया। कानून बनाने की जिम्मेदारी श्रम मंत्रालय को दी गई। श्रम मंत्रालय ने छह महीने में हाथ खड़े कर दिए। बाद में ग्रामीण विकास मंत्रालय को कानून बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गईं।

रघुवंश ने इस कानून को बनवाने और पास कराने में अहम भूमिका निभाई। कहा जाता है कि इस कानून को लेकर उस दौरान कैबिनेट में कई लोग सवाल खड़े कर रहे थे। रघुवंश ने सबको राजी किया। आखिर में इसे पास कराने में कामयाब रहे। 2 फरवरी 2006 को देश के 200 पिछड़े जिलों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना लागू की गई। 2008 तक यह भारत के सभी जिलों में लागू की जा चुकी थी। राजनीतिक विश्लेषकों मानना है कि 2009 में इसी योजना ने कांग्रेस की सत्ता में वापसी कराई थी।

0





Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here