यूपी सरकार ने ‘लव जिहाद’ के अध्यादेश को मंजूरी दे दी है.

यूपी सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में ‘लव जिहाद’ की घटनाओं को रोकने के लिए एक अध्यादेश (Love Jihad Ordinance) को मंजूरी दे दी है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 24, 2020, 11:25 PM IST

लखनऊ. उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने तथाकथित ‘लव जिहाद’ की घटनाओं को रोकने के लिए एक अध्यादेश (Love Jihad Ordinance) को मंजूरी दे दी. इसके तहत विवाह के लिए छल, कपट, प्रलोभन या बलपूर्वक धर्मांतरण कराए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान है. राज्य सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह (Siddharth Nath Singh) ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020’ को मंजूरी दे दी गई.

इसके अलावा सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि इस अध्यादेश के तहत ऐसे धर्म परिवर्तन को अपराध की श्रेणी में लाया जाएगा जो छल, कपट, प्रलोभन, बलपूर्वक या गलत तरीके से प्रभाव डालकर विवाह या किसी कपट रीति से एक धर्म से दूसरे धर्म में लाने के लिए किया जा रहा हो. उन्होंने बताया कि इसे गैर जमानती संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखने और उससे संबंधित मुकदमे को प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की न्यायालय में विचारणीय बनाए जाने का प्रावधान किया जा रहा है.

कानून मंत्री बृजेश पाठक ने कही थी ये बातइससे पहले लव जिहाद के कड़े कानून की आवश्यकता पर जोर देते हुए कानून मंत्री बृजेश पाठक ने कहा था कि राज्य में ऐसे मामलों में वृद्धि हुई है, जो सामाजिक शर्मिंदगी और दुश्मनी का कारण बने हैं. इन मामलों से माहौल खराब हो रहा है इसलिए एक सख्त कानून समय की जरूरत है. पिछले महीने जौनपुर और देवरिया में हुए उपचुनावों के लिए रैलियों को संबोधित करते हुए योगी ने कहा था कि उनकी सरकार ‘लव जिहाद’ से निपटने के लिए एक कानून लेकर आएगी.

सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामले में संबंधित सामाजिक संगठनों का पंजीकरण रद्द कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

कोई धर्मांतरण छल, कपट, जबरन या विवाह के जरिए नहीं किया गया है, इसके सबूत देने की जिम्मेदारी धर्म परिवर्तन कराने वाले तथा करने वाले व्यक्ति पर होगी.

अध्यादेश का उल्लंघन करने पर कम से कम एक साल और अधिकतम पांच साल कैद व 15000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

नाबालिग लड़की, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला के मामले में यह सजा तीन साल से 10 वर्ष तक की कैद और 25000 रुपये जुर्माने की होगी. इसके अलावा सामूहिक धर्म परिवर्तन के संबंध में अधिकतम 10 साल की कैद और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है.

अध्यादेश में धर्म परिवर्तन के इच्छुक लोगों को जिला अधिकारी के सामने एक निर्धारित प्रोफार्मा पर दो महीने पहले इसकी सूचना देनी होगी. इजाजत मिलने पर वे धर्म परिवर्तन कर सकेंगे. इसका उल्लंघन करने पर छह महीने से तीन साल तक की कैद और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा तय की गई है.





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