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लद्दाख बॉर्डर (Ladakh Border) पर भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव (Border Tension) के बीच दोनों देशों की सेनाएं तैयारी में कोई कसर न छोड़ने के मूड में आ चुकी हैं. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने जहां, VT-4 हल्के टैंक तैनात कर दिए हैं, तो भारत की निगाहें रूस निर्मित हल्के टैंक (Russian Made Light Tank) ‘स्प्रूत एसडी’ पर लगी हुई हैं. दूसरी तरफ, चीनी सेना प्राइवेट कंपनियों से मानवहीन चॉपर ड्रोन (Chopper Drone) और अन्य ​हथियारों की खरीदी भी कर रही है. इस पूरी कवायद से साफ संकेत है कि निकट भविष्य में दोनों ही देश युद्ध की स्थिति में कोई रिस्क नहीं लेना चाहते.

भारत ने बॉर्डर पर तैनाती के लिए स्वदेशी लाइट टैंक की योजना बना ली है और डीआरडीओ इसे हरी झंडी भी दे चुका है, लेकिन इसमें चूंकि समय लगेगा, इसलिए भारत रूसी टैंक के बारे में भी शिद्दत से विचार कर रहा है. इस टैंक पर भारत की नज़र क्यों टिक गई है, यह बताने के साथ आपको यह भी बताते हैं कि चीन की जंगी तैयारी के ताज़ा अपडेट क्या हैं.

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क्यों खास है Sprut-SD टैंक?यह हल्का टैंक दुश्मन के भारी शस्त्रों को नष्ट करने की क्षमता रखता है, जिसमें 125 एमएम की बंदूक लगी है. इसकी फायर पावर T-72, T-90 के साथ ही नवीनतम T-14 की तरह ही है. ये जल थल वाले टैंकों को मार गिराने में भी माहिर है. सोवियत काल का यह टैंक नवीनतम तकनीक से अपडेट है और अभी भी रूस की सेना की कुछ यूनिटों में सेवा दे रहा है.

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चीन सैन्य खरीदी में तेज़ी दिखा रहा है.

इस टैंक का वज़न करीब 18 टन है, जो कि चीन के उस VT-5 टैंक की तुलना में करीब आधा है, जिसमें 105 एमएम की बंदूक है. हल्का होते हुए भी ज़्यादा फायरपावर कैरी कर सकने वाला यह टैंक ज़्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है और भारत के जंगी टैंक अजेय T-72 और T-90 के साथ इसकी जुगलबंदी भी बेहतर हो सकती है. ये तीनों टैंक साथ मिलकर एक बेहतरीन सुरक्षा कवच बना सकते हैं.

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इसके अलावा, स्प्रूत टैंक में लगी गन में ऑटोलोडर का होना बड़ी खासियत है, जिससे प्रति मिनट 6 से 8 राउंड फायर की क्षमता सुनिश्चित होती है. रिपोर्ट्स कह रही हैं कि भारतीय आर्मी हल्के टैंक की अपनी ज़रूरत पूरी करने के लिए रूस के इस टैंक से उम्मीद कर सकती है. दूसरी तरफ, चीन भी पूरी तैयारी में है.

भारत बॉर्डर के लिए चीन की कवायद
चीन की पीएलए अपने सैनिकों के लिए कड़ाके की ठंड को मद्देनज़र रखते हुए ग्रैफीन से बने खास कपड़ों का इंतज़ाम कर रही है. कार्बन निर्मित क्रांतिकारी मटेरियल ग्रैफीन की खोज के लिए वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार भी मिल चुका है. बहरहाल, चीनी सशस्त्र बल कई तरह के सैन्य सामानों की खरीदी कर रही है, जिसमें कई तरह के ​हथियारों की खरीदी भी शामिल है.

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हथियारों में खास ध्यान देने लायक है चॉपर ड्रोन. दक्षिण चीन बेस्ड कुछ कंपनियां ड्रोन तकनीक में माहिर हैं, इनसे चीनी सेना बगैर मनुष्य के उड़ान भर पाने और लैंडिंग कर सकने वाले ड्रोन खरीद रही है. रिपोर्ट्स की मानें तो पीएलए की तिब्बत कमांड ने 22 प्राइवेट हथियार निर्माता कंपनियों के साथ मीटिंग करने के बाद कुछ ​हथियारों का रिव्यू किया. कहा गया है कि भारत के बॉर्डर पर खास तौर से तैनात करने के लिए चीनी सेना यह खरीदी कर रही है.





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