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कुछ माउथवाश कोविड-19 को रोकने में सहायक हो सकते हैं: अध्ययन (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Daily Mouthwash may inactivate human COVID 19: मेडिकल वायरोलॉजी की पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि इनमें से कुछ उत्पाद संक्रमण के बाद मुंह में वायरल लोड, यानी वायरस की मात्रा को कम करने के लिए उपयोगी हो सकते हैं.

वाशिंगटन. कुछ माउथवाश और मुंह की सफाई के लिए उपयोग की जाने वाली एंटीसेप्टिक दवाएं इंसानों में कोरोना वायरस (Coronavirus) को निष्क्रिय कर सार्स कोविड-19 (COVID-19) वायरस को फैलने से रोकने में सहायक सिद्ध हो सकती हैं. एक अध्ययन में यह पता चला है. मेडिकल वायरोलॉजी की पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि इनमें से कुछ उत्पाद संक्रमण के बाद मुंह में वायरल लोड, यानी वायरस की मात्रा को कम करने के लिए उपयोगी हो सकते हैं.

अमेरिका में पेन स्टेट कॉलेज ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने मानव कोरोना वायरस को निष्क्रिय करने की क्षमता जानने के लिए कई माउथवाश और नेजोफेरिंजियल रिन्ज की जांच की. टीम ने पाया कि इनमें से कई में कोरोना वायरस को बेअसर करने की क्षमता थी जिससे पता चलता है कि इन उत्पादों में कोविड-19 से संक्रमित लोगों द्वारा फैलने वाले वायरस की मात्रा को कम करने की क्षमता हो सकती है.

पेन स्टेट कॉलेज ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर क्रेग मेयर्स ने कहा, ‘जब तक हम वैक्सीन के विकसित होने का इंतजार करते हैं, तबतक प्रसार को कम करने के तरीकों की आवश्यकता है.’ मेयर्स ने कहा, ‘जिन उत्पादों का हमने परीक्षण किया, वे आसानी से उपलब्ध हैं और लोग अपनी दैनिक दिनचर्या में उन्हें उपयोग करते हैं.’

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सर्दियों में बढ़ सकता है कोरोना वायरस का खतरा ज्यादा: अध्ययन
कोरोना वायरस पर रोज नए-नए अध्ययन और शोध हो रहे हैं जिनमें अलग-अलग तर्क और जोखिमों को पेश किया जा रहा है. वायरस के मद्देनजर एक शोध के मुताबिक, जिन देशो में कोरोनावायरस का प्रकोप ज्यादा है वहां वायु प्रदूषण इसके सामान्य विभाजक की भूमिका निभा सकता है. यह अध्ययन इसी साल मार्च में किया गया था. शोधकर्ताओं ने चेताया है कि सर्दियों में न केवल वायरस तेजी से फैलेगा बल्कि वायु प्रदूषण और स्मॉग का खतरा भी बढ़ जाएगा. राजधानी दिल्ली और इसके आस-पास के इलाकों में इसका खतरा अधिक बताया जा रहा है.

कोविड-19 और वायु प्रदूषण में संबंध

अभी तक के अध्ययनों में बताया गया है कि कोविड-19 से व्यक्ति की श्वसन प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. लेकिन समय के साथ यह पाया गया है कि वायरस व्यक्ति के लिए पूरे शरीर के लिए हानिकारक बन गया है जो शरीर में मौजूद लगभग सभी महत्वपूर्ण अंगों का नुकसान पहुंचा रहा है. कोरोना वायरस पर हुए पूर्व अध्ययनों में यह तर्क सही साबित हुए तो इस वायरस का वायु प्रदूषण से सीधा संबंध हो सकता है क्योंकि दोनों ही अवस्था में फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है.





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