Friday, July 23, 2021
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भ्रष्टाचार के दशकों पुराने मामले में, केवल खानापूर्ति, कश्मीर में दागी लोगों को मलाईदार पदों, अधिकारी पदों, सत्ता और पदोन्नति का आनंद लेना | भ्रष्टाचार के दशकों पुराने केस में महज खानापूर्ति, कश्मीर में दागियों को मलाईदार पद, अधिकारी पद, शक्ति और पदोन्नति


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श्रीनगरएक घंटा पहलेलेखक: मोहित कंर्ड

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जम्मू कश्मीर में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कुछ साल पहले जोर-शोर से हुआ 'व्र अगेंस्ट करप्शन' का अभियान का नहीं दिखा रहा है।  (सिंहबलिक फोटो) - दैनिक भास्कर

जम्मू कश्मीर में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कुछ साल पहले जोर-शोर से हुआ ‘व्र अगेंस्ट करप्शन’ का अभियान का नहीं दिखा रहा है। (सिंबॉलिक फोटो)

जम्मू कश्मीर में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कुछ साल पहले जोर-शोर से ‘व्र अगेंस्ट करप्शन’ का अभियान शुरू हुआ। एक तरफ, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ घूस लेने और पावर का गलत इस्तेमाल करने पर भ्रष्टाचार के केस दर्ज करवाए जा रहे हैं।]

दूसरी ओर, तमाम बड़े सरकारी अधिकारी भ्रष्टाचार के मुकदमें दर्ज होने के बाद भी सत्ता, पद और प्रमोशन का आनंद ले रहे हैं। ज्यादातर के मामले में जांच की अप बैलगाड़ी की गति से चल रही है या जा रही ही नहीं रही है। कुछ नौकरशाहों के खिलाफ एक दशक पहले दर्ज मामलों में अभी भी जांच जारी है या उनकी फाइलें, सत्ता के वजन से दबी हुई हैं।

यूटी प्रशासन अक्सर दावा करता है कि अज्ञात स्रोतों और भ्रष्टाचार के खिलाफ वह लगातार अभियान चला रहा है। हालांकि चल रही जांचों की पड़ताल करने पर कुछ अलग ही तस्वीर दिखती है। 31 मार्च 2019 के लिए सोशल, जनरल, इकोनॉमिक और रेवेन्यू सेक्टर पर हालिया कैग रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर की वर्किंग कल्चर का भी खुलासा होता है। वर्षों से विकास के कार्यों के लिए आया फंड का उपयोग ही नहीं हुआ है। वहीं, विभिन्न मामलों में पैसे की लूट के लिए गैर-जरूरी खर्च किए गए। ज्यादातर मामलों में किसी को सजा नहीं मिली है।

केस -1: गुलमर्ग के भूलेखों के आरोपी बशीर अभी तक गवर्नर के सलाहकार हैं

वर्ष 2009 में चिरचित गुलमर्ग के भू लेखों में बशीर अहमद खान का नाम आया। खान तब बारामूला के डिप्टी कमिशनर थे, जब कोरोडों की सरकारी जमीनों को अवैधकानूनी तरीके से प्राथमिक होटलों को देने का चार्ज लगाया जाता था। मार्च 2009 में कानून सहित 20 लोगों के खिलाफ मामला (एफआईआर नंबर 08-2009 पी / एस VOK) दर्ज किया गया। 2016 में खान का प्रमोशन हुआ। 2019 में रिटायरमेंट के बाद एक्सटेंशन मिला।

केस -2: लाइट ग्राउंड राइट्स के आरोपी सीईओ हिज अब प्रधान सचिव
मई 2014 में रोशनी जमीनी कार्यक्रमों में हीरा कुमार का नाम आया। कोर्ट के आदेश पर जम्मू, ऊधमपुर, श्रीनगर और पुलवामा में चार एफआईआर दर्ज हुईं। 2019 में एंट करप्शन के विशेष जज ने फाइनल रिपोर्ट को रिजेक्ट कर दिया। तल्ख टिप्पणियाँ करते हुए नए सिरे से जांच करने को कहा। वर्तमान में इस जाँच की जांच सीबीआई कर रही है और हिमाचल प्रदेश के पास मुख्य सचिव का अतिरिक्त प्रभार है।

केस -3: फेक गन लाइसेंस राइटर्स के आरोपी आईएएस अब सेक्रेटरी
आईएएस कुमार राजीव रंजन का नाम फेक गन लाइसेंस राइटर्स में आया। सीबीआई द्वारा गिरफ्तार होने के पहले वे मार्च 2020 में सस्पेंड हुए। गिरफ्तारी के जब रंजन एडिशनल सीईओ, मेट्रोपोलिटन रेगुलेटरी अथॉरिटी जम्मू थे। वाइस चेयरमैन, जम्मू डेवलेपमेंट अथॉरिटी का एडिशन चार्ज था। फरवरी 2021 में राजीव का सस्पेंशन खत्म कर दिया गया। अब वे रेवेन्यू विभाग में एडिशनल सेक्रेटरी हैं।

केस -4: 25 हजार करोड़ के लाइट प्रोग्राम के लिए ज्यादातर आरोपी पावर में
गुलमर्ग भूमि लेखों को आम बोलचाल में रोशनी जमीन लेखों के नाम से भी जाना जाता है। 2009 का यह स्कला 25 हजार करोड़ रुपए का माना जाता है। जे-हाई कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने इस मामले में कई केस दर्ज किए हैं। इसमें सरकारी और जंगल की जमीन को गैरकानूनी तरीके से प्रमुख लोगों को देकर फायदा पहुंचाया गया। इस लेख के ज्यादातर आरोपी अधिकारी पद और पावर का मजा ले रहे हैं।

  • साल 2020 में 33 केस जम्मू में और कश्मीर में 38 केस दर्ज हुए। ज्यादातर में बस जांच चल रही है।
  • वर्ष 2019 में 40 केस जम्मू और 33 केस कश्मीर में दर्ज किए गए। इनमें भी महज खानापूर्ति जैसा मामला है।
  • ज्यादातर अज्ञात स्रोत से आय, घूस, डिफॉल्ट लोन पेमेंट और फंड का दुरुपयोग करने जैसे मामले हैं।
  • सरकारी सूत्रों के मुताबिक पांच दर्जन से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले चल रहे हैं।

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