माइनस 30 डिग्री सेल्सियस से कम होने के साथ चीनी सैनिकों की स्थिति खराब हो गई है.

US Defence Policy Bill Passed in Both House: अमेरिकी कांग्रेस ने 740 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानि 5,44,66,96,00,00,000 रुपये का डिफेंस पॉलिसी बिल पास कर दिया है. अमेरिकी कांग्रेस ने इस बिल में भारत-चीन सीमा विवाद में अमेरिकी कांग्रेस ने भारत का पक्ष लिया है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    December 16, 2020, 6:39 PM IST

वाशिंगटन. भारत-चीन सीमा विवाद (India-China Border Dispute)मामले में अमेरिका ने भारत को समर्थन दिया है. दरअसल, अमेरिकी कांग्रेस (American Congress) ने 740 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानि 5,44,66,96,00,00,000 रुपये का डिफेंस पॉलिसी बिल पास कर दिया है. अमेरिकी कांग्रेस ने इस बिल में भारत-चीन सीमा विवाद में अमेरिकी कांग्रेस ने भारत का पक्ष लिया है. इस बिल में चीन से भारत की सीमा से लगी एलएसी पर अपना आक्रामक रवैया नरम करने को कहा है. गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच मई 2020 से ही वास्तविक सीमा रेखा (एलएसी) पर गतिरोध बना हुआ है. दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया है.

बिल में शामिल किए गए भारतीय-अमेरिकी राजा कृष्णमूर्ति के सुझाव

अमेरिकी कांग्रेस ने मंगलवार को के दोनों सदनों हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव और सीनेट में नेशनल डिफेंस अथराइजेशन एक्ट को पारित कर दिया. इस बिल में भारतीय-अमेरिकी राजा कृष्णमूर्ति के संकल्प पत्र के प्रमुख सुझाव शामिल किए गए हैं जिसमें चीन सरकार से एलएसी पर भारत के साथ अपनी आक्रामता खत्म करने का आग्रह किया गया है.

बिल पर डोनाल्ड ट्रंप की मुहर लगनी बाकीइस बिल को दोनों सदनों से पारित कराने से पहले इसका कांग्रेस कमेटी ने मिलकर इसका पुनर्गठन किया था. इस बिल में उस प्रावधान को भी शामिल किया, जिसे कृष्णमूर्ति ने सुझाए थे. दिलचस्प बात यह है कि राजा कृष्णमूर्ति ये सुझाव बिल पारित हो जाने के बाद लेकर पहुंचे थे. यह प्रावधान भारत-प्रशांत क्षेत्र और उससे आगे भारत में अपने सहयोगियों और साझेदारों के लिए अमेरिकी सरकार के मजबूत समर्थन को दर्शाता है. इस बिल पर अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुहर लगनी बाकी है.

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हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने बिल पर वीटो लगाने की धमकी दी है क्योंकि उनका मानना है कि इस बिल में सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कानूनी सुरक्षा की कमी है. कृष्णमूर्ति ने कहा कि “हिंसात्मक आक्रामकता का शायद ही जवाब हो. यह उस विवादित सीमा क्षेत्र, जिसे एलएसी के माना जाता है, के लिए बिल्कुल ही सच है जो पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को भारत से अलग करता है.’ उन्होंने आगे कहा कि ‘एनडीएए में मेरी संकल्प भाषा को शामिल करने और कानून में उस कानून पर हस्ताक्षर करना संयुक्त राज्य सरकार का एक स्पष्ट संदेश होगा कि भारत के खिलाफ चीन के सैन्य उकसावों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.”





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