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फ्रांस में इस्लामिक कट्टरपंथियों के खिलाफ बनेगा कड़ा कानून

France Church Attack: फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने देश में बढ़ रही धार्मिक कट्टरता के खिलाफ एक कड़ा कानून लाने की प्रक्रिया पर काम शुरू कर दिया है. इस कानून में स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में धर्म आधारित सहूलियत नहीं दी जाएंगी.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 4, 2020, 12:28 PM IST

पेरिस. पैगंबर मोहम्‍मद साहब के कार्टून विवाद के बीच फ्रांस (France Terror Attack) में लगातार कई आतंकी हमले हो चुके हैं. हालांकि फ्रांस सरकार कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई में प्रतिबद्ध नज़र आ रही है और धार्मिक कट्टरता को रोकने के लिए जल्द कड़ा कानून बनाने जा रही है. AFP के मुताबिक फ्रांस के इस नए कदम से मुस्लिम देशों में फिर एक बार गुस्सा भड़क सकता है. कट्टरपंथ के खिलाफ छेड़ गए अपने युद्ध में फ्रांसीसी सरकार ने एक ऐसे कानून को संसद में पेश करने जा रही है जिससे मुस्लिम देशों की तरफ से कड़ा विरोध किया जा सकता है.

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने वियना में हुए हमले पर कहा कि अब आतंकियों को यह बताने का समय आ गया है कि उनका पाला किनसे पड़ा है. उन्होंने इस बर्बर आतंकी घटना की कड़ी निंदा भी की. मैक्रों पहले ही फ्रांस में मस्जिदों के वित्‍तपोषण की निगरानी और धार्मिक गुटों के स्‍कूलों और अन्‍य संगठनों की जांच की बात कह चुके हैं. नए कानून में इस तरह की जांच के लिए पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों को फ्री हैण्ड देने की बात कही जा रही है. उन्होंने फ्रांसीसी संसद में पेश किए जाने वाले एक बिल को लेकर कहा कि अगर किसी पुरुष ने महिला डॉक्‍टर से इलाज करवाने से मना किया तो उसे 5 साल तक जेल में डाला जा सकता है और 75 हजार यूरो का जुर्माना लगाया जा सकता है. ऐसा ही महिलाओं के साथ भी किया जा सकता है अगर वह किसी पुरुष डॉक्टर से इलाज कराने से मना करती है.

शिक्षा, स्वास्थ्य में कट्टर परंपराएं नहीं चलेंगी
फ्रांस के मंत्री गेराल्‍ड ने कहा कि उन लोगों के खिलाफ सख्‍त कदम उठाए जाएंगे जो अधिकारियों पर दबाव डालते हैं या जो शिक्षकों के पाठ को ग्रहण करने से इनकार करते हैं. फ्रांसीसी मंत्री के इस बयान से सोशल मीडिया में बवाल मच गया है. बड़ी संख्‍या में मुसलमान ट्वीट करके फ्रांसीसी मंत्री के इस बयान की कड़ी आलोचना कर रहे हैं. यही नहीं मुस्लिम 5 साल की सजा और भारी जुर्माने पर भी सवाल उठा रहे हैं. इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शनिवार को कहा था कि जो मुस्लिम पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को लेकर परेशान हैं, हम उनका सम्मान करते हैं लेकिन इस आधार पर हिंसा को सही नहीं ठहराया जा सकता है. बता दें कि फ्रांस में पिछले दो हफ्ते में हुए हमलों के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पेरिस में एक स्कूल टीचर के बाद नीस के चर्च में तीन लोगों की हत्या कर दी गई और शनिवार को लियोन में एक पादरी को गोली मार दी गई.ऑस्ट्रिया और फ्रांस में हमले के बाद ब्रिेटन में खतरे की श्रेणी बढ़ाई गई

ब्रिटेन में आतंकवादी हमले के खतरे को मंगलवार को ‘पर्याप्त’ से बढ़ाकर ‘गंभीर’ कर दिया गया. यहां खतरे की श्रेणी में इस श्रेणी को दूसरे स्थान पर रखा जाता है, जिसका मतलब इस रूप में देखा जाता है कि हमले की आशंका ‘काफी ज्यादा’ है. ब्रिटेन की गृह मंत्री प्रीति पटेल ने पिछले सप्ताह फ्रांस में हमले और इस सप्ताह ऑस्ट्रिया में हुए हमले के बाद इसे ‘एहतियाती कदम’ बताया है. पटेल ने कहा, ‘‘ ब्रिटेन के लोगों को चिंतित नहीं सतर्क रहना चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि देश के भीतर पुलिस की मौजूदगी स्पष्ट रूप से दिखेगी. उन्होंने कहा, ‘‘ खतरे के मद्देनजर यह सही है…लोगों को चिंतित नहीं होना चाहिए. यह एहतियाती कदम है.’

पटेल ने कहा, ”जैसा कि मैं पहले भी कह चुकी हूं कि हम ब्रिटेन में एक वास्तविक और गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं. मैं लोगों से कहना चाहूंगी कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी पुलिस को दें.” सोमवार को वियना में गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई. इससे पहले फ्रांस के नीस में चाकू से हमले में तीन लोगों की मौत हो गई और पिछले महीने एक शिक्षक की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी.





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