सिस्टाइटिस के लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.


सिस्टाइटिस के लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.

बैक्टीरियल सिस्टाइटिस (Cystitis) के ज्यादातर मामले ई कोलाई बैक्टीरिया के एक प्रकार की वजह से होता है. इसके पीछे कई असंक्रामक कारक भी हो सकते हैं.



  • Last Updated:
    December 16, 2020, 8:00 AM IST

मूत्राशय यानी ब्लैडर का संक्रमण एक दर्दनाक और परेशान करने वाली स्थिति होती है और यदि यह संक्रमण मूत्राशय से किडनी में फैल जाए तो एक गंभीर समस्या बन जाती है. मूत्राशय में सूजन, लालिमा और जलन होना सिस्टाइटिस कहलाता है. ये सूजन और जलन बैक्टीरियल संक्रमण के कारण भी हो सकती है जिसे बैक्टीरियल सिस्टाइटिस कहते हैं, इसमें शरीर से बाहर के बैक्टीरिया मूत्रमार्ग के अंदर से मूत्राशय तक पहुंच जाते हैं और वहां पर जाकर अपनी संख्या में वृद्धि करने लगते हैं.

सिस्टाइटिस के ये हैं लक्षण

सिस्टाइटिस होने पर बार-बार पेशाब आना, पेशाब में खून, जलन, पेल्विक वाले हिस्से में तकलीफ, पेट के निचले हिस्से में दबाव महसूस होना, हल्का बुखार आदि समस्याएं हो सकती हैं. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.इन कारणों से होता है रोग

myUpchar के अनुसार, बैक्टीरियल सिस्टाइटिस के ज्यादातर मामले ई कोलाई बैक्टीरिया के एक प्रकार की वजह से होता है. इसके पीछे कई असंक्रामक कारक भी हो सकते हैं जैसे लंबे समय से कैथेटर का इस्तेमाल करना, केमिकल युक्त उत्पादों का इस्तेमाल, कीमोथेरेपी दवाएं, रेडिएशन थेरेपी आदि. यह रोग पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक शिकार बनाता है क्योंकि महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा छोटा मूत्रमार्ग होता है, जिस वजह से यह बैक्टीरिया ब्लैडर तक आसानी से पहुंच जाते हैं. महिलाओं में यह समस्या यौन संभोग, गर्भावस्था के दौरान हार्मोन में बदलाव, कुछ प्रकार की गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करने की वजह से हो सकता है.

निदान और इलाज

सिस्टाइटिस के लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. वे यूरिन टेस्ट करते हैं जिसके जरिए पेशाब में बैक्टीरिया, खून या मवाद की जांच की जाती है. सिस्टोस्कोपी द्वारा ब्लैडर का निरीक्षण किया जाता है. एक्स रे और अल्ट्रासाउंड की मदद से मूत्राशय में सूजन और जलन के अन्य संभावित कारणों का पता लगाया जाता है जैसे ट्यूमर या अन्य संरचना संबंधी समस्याएं. आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं से बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से होने वाले सिस्टाइटिस का उपचार किया जाता है. वहीं असंक्रामक सिस्टाइटिस का उपचार उसके अंदरूनी कारणों पर निर्भर करता है.

ऐसे करें बचाव

बार-बार होने वाले मूत्राशय के संक्रमण के लिए डॉक्टर कुछ सुझाव देते हैं. इस स्थिति से बचने के लिए पेशाब की इच्छा होने पर बिना देरी किए पेशाब करने जाएं. केमिकल युक्त उत्पादों को जननांग वाले हिस्से में इस्तेमाल न करें. खूब पानी और तरल पदार्थ पिएं। योनि और गुदा के आसपास की त्वचा को धीरे-धीरे धोएं जिसमें कठोर साबुन का इस्तेमाल न करें. यौन संभोग के बाद जितना जल्दी हो सके अपने मूत्राशय को खाली कर दें क्योंकि ऐसा करने से बैक्टीरिया पेशाब से बाहर निकल जाएंगे. गुदा वाले हिस्से के बैक्टीरिया को योनि और मूत्रमार्ग में फैलने से रोकने के लिए मल त्याग के बाद बहुत अच्छे से सफाई करें.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, सिस्टाइटिस पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।





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