शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे सादिक लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे (फाइल फोटो)

शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे सादिक (Maulana Kalbe Sadiq) मजहबी और सियासी, हर मसले पर बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जाने जाते थे. सियासत को लेकर मौलाना कल्बे सादिक ने हमेशा एक ही बात कही कि मैं किसी पार्टी का नुमाइंदा नहीं हूं जो एकतरफा बात करूं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 25, 2020, 9:02 AM IST

नई दिल्ली. मौलाना कल्बे सादिक (Maulana Kalbe Sadiq) बेशक शिया धर्मगुरु (Shia cleric) थे, लेकिन उनकी मान्यता हर मजहब और मसलक में थी. इसीलिए जब भी मौका पड़ने पर मौलाना सादिक ने जो भी कहा उस पर कभी कोई विवाद नहीं हुआ. क्योंकि नाम के मुताबिक वो दिल के सच्चे थे. तीन तलाक (Triple Talaq), राम मंदिर (Ram Mandir), हलाला और शिया-सुन्नी जैसे विवादों का वो हमेशा रास्ता भी सुझाते रहे और जब मामला कोर्ट में हुआ तो उस पर चुप्पी भी साध ली. मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के सदस्य भी रहे.

तीन तलाक का गलत मतलब निकाला गया
न्यूज18 हिंदी के साथ हुई बातचीत में तीन तलाक पर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे सादिक ने कहा था कि हम एक बैठक करने जा रहे हैं. बैठक एक ही समय में एक साथ बोले जा रहे तीन तलाक के मुद्दे पर होगी. वैसे तो कुरान में भी तीन तलाक का जिक्र आया है. लेकिन कुछ लोगों ने उसका गलत मतलब निकाल लिया है. गलत मतलब निकालने के चलते आई परेशानी से बचने के लिए ही ये बैठक करने जा रहे हैं.

दिल्ली में कोरोना का कहर, पिछले 23 दिन में हुईं 2000 से ज्यादा मौतेंकुछ जाहिलों की वजह से है शिया-सुन्नी विवाद
शिया-सुन्नी विवाद की जड़ की असली वजह बताते हुए धर्मगुरु मौलाना डॉक्टर कल्बे सादिक कहते थे कि शिया-सुन्नी की लड़ाई देश में हो या विदेशों में ये सिर्फ जहालत (निरक्षरता) की वजह से हो रही है. चंद बिना पढ़े-लिखे लोग हैं जो आज भी कुछ पुराने मुद्दों पर इस लड़ाई को जारी रखे हुए हैं. जबकि ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो इस लड़ाई को हरगिज नहीं चाहते हैं. उनका कहना था कि हजरत मुहम्मद साहब के बाद अगला खलीफा कौन होगा इसे लेकर यह विवाद चला आ रहा है.

ज़मीन नहीं दिल जीतने की कोशिश करें
राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर मौलाना कल्बे सादिक कुछ नहीं बोले. हमेशा चुप्पी साधते हुए यही कहा कि मामला कोर्ट में है और फैसला कोर्ट को करने दें. लेकिन दूसरी ओर जब कुछ लोग कोर्ट में मामला होने के बाद भी तरह-तरह के बयान देते थे तो ऐसे में मौलाना सादिक यही कहा करते थे कि ज़मीन नहीं दिल जीतने की कोशिश करो. अगर केस जीत भी जाओ तो खुशी-खुशी ज़मीन मंदिर के लिए दे दो.

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पार्षद से सांसद तक के लिए की दुआ
सियासत को लेकर मौलाना कल्बे सादिक ने हमेशा एक ही बात कही कि मैं किसी पार्टी का नुमाइंदा नहीं हूं जो एकतरफा बात करूं. मुझे तो जो भी आवाम के हक में काम करता हुआ दिखाई देगा मैं उसके हक में बात करूंगा. यही वजह थी कि वो पार्षद से लेकर सांसद तक को अपनी दुआओं से नवाजते थे.





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