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आर्मीनिया-अजरबैजान के बीच फिर युद्ध शुरू

Armenia-Azerbaijan War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Doanld Trump) के सभी दावे फेल हो गए हैं और शांति समझौते के तीन दिन बाद ही आर्मीनिया और अजरबैजान में फिर जंग छिड़ गयी है. आर्मीनियाई सैनिकों ने बर्दा में स्‍मर्च मिसाइलें दागीं और क्‍लस्‍टर बम का इस्‍तेमाल किया जिससे बड़ी संख्‍या में आम नागरिक मारे गए हैं. अजरबैजान ने कहा कि इस हमले में 21 आम नागरिक मारे गए हैं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 29, 2020, 12:07 PM IST

येरेवान/बाकू. अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald trump) के दावे तीन भी नहीं टिक सके और आर्मीनिया और अजरबैजान (Armenia-Azerbaijan War) के बीच फिर जंग शुरू हो गयी है. इससे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम पर सहमति बन गयी है. बुधवार को आर्मीनिया और अजरबैजान दोनों ने ही एक-दूसरे पर भीषण हमले करने का आरोप लगाया. अजरबैजान की सरकार ने कहा है कि नागोर्नो-काराबाख के पास आर्मीनिया की ओर से किए गए मिसाइल हमले में 21 लोगों की मौत हो गई है. उधर, आर्मीनिया ने आरोप लगाया है कि अजरबैजान की सेना लगातार रॉकेट से हमले कर रही है जिसमें कई लोग हताहत हुए हैं.

रूस की संवाद एजेंसी रिया नोवोस्‍ती ने आर्मीनिया के प्रधानमंत्री के हवाले से इस बात की पुष्टि की है कि रूसी सीमा रक्षक नागोर्नो-काराबाख में आर्मीनिया की सीमा पर तैनात किए गए हैं. आर्मीनिया के पीएम ने कहा कि रूसी सीमा रक्षकों की तैनाती में कुछ भी विशेष नहीं है. आर्मीनिया ने माना है कि अजरबैजान की फौज ने ईरान से लगते रणनीतिक रूप से महत्‍वपूर्ण गुबादली कस्‍बे पर कब्‍जा कर लिया है. इससे पहले रूस ने इशारों ही इशारों तुर्की, इजरायल समेत अन्‍य विदेशी ताकतों को गंभीर चेतावनी दी थी. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लवरोव ने कहा कि इस संकट का राजनयिक समाधान मुमकिन है. उन्‍होंने सभी विदेशी ताकतों को चेतावनी दी कि वे इसके सैन्‍य समाधान को बढ़ावा देना बंद कर दें. लवरोव ने कहा कि यह कोई सीक्रेट नहीं है कि हम इस समस्‍या के सैन्‍य समाधान की संभावना का समर्थन नहीं करते हैं. आर्मीनिया ने कहा कि अजरबैजान की सेना नागोर्नो-काराबाख के नागरिकों के इलाके में हमले कर रही है.

स्‍मर्च मिसाइलें दागी जा रही हैं, क्लस्टर बम भी हुए इस्तेमाल
आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान ने कहा, ‘रूसी बार्डर गार्ड आर्मीनिया की तुर्की और ईरान की लगती सीमा पर मौजूद हैं. अब इस ताजा घटनाक्रम के बाद रूसी बार्डर गार्ड्स को देश की दक्षिणी पूर्वी और दक्षिणी-पश्चिमी सीमा पर तैनात किया गया है.’ बुधवार को हुई लड़ाई आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच ट्रंप के मानवीय संघर्ष विराम कराए जाने के बाद हुई है.अजरबैजान के राष्‍ट्रपति के सहायक हिकमेट हज‍ियेव ने कहा कि आर्मीनियाई सैनिकों ने बर्दा में स्‍मर्च मिसाइलें दागीं. यही नहीं आर्मीनिया की सेना ने क्‍लस्‍टर बम का इस्‍तेमाल किया जिससे बड़ी संख्‍या में आम नागरिक मारे गए हैं. अजरबैजान ने कहा कि इस हमले में 21 आम नागरिक मारे गए हैं और कम से कम 70 अन्‍य घायल हो गए हैं. उधर, आर्मीनिया ने आरोप लगाया है कि उसकी सेना कुछ जगहों से जानबूझकर पीछे हटी है और वहां पर अब अजरबैजान आतंकी अड्डे बना रहा है जिसमें तुर्की उसकी मदद कर रहा है.

तुर्की भी सेना भेजने के लिए तैयार
रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि हमारा मानना है कि आर्मीनिया और अजरबैजान दोनों ही हमारे मित्र देश हैं. हम सैन्‍य समाधान के विचार का समर्थन नहीं करते हैं. इससे पहले मध्‍य एशिया में ‘खलीफा’ बनने की चाहत रखने वाले तुर्की ने ऐलान किया था कि अगर अजरबैजान की ओर से अनुरोध आया तो वह अपनी सेना को भेजने के लिए तैयार है. सुपरपावर रूस के पड़ोसी देशों आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-काराबाख इलाके पर कब्‍जे के लिए जंग चल रही है और अगर तुर्की इसमें शामिल होता है तो तीसरे विश्‍व युद्ध का खतरा पैदा हो जाएगा.





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