शरीर के मुख्य कार्यों के लिए हर व्यक्ति को रोजाना कम से कम 100 मिलीग्राम पोटेशियम की आवश्यकता होती है.
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शरीर के मुख्य कार्यों के लिए हर व्यक्ति को रोजाना कम से कम 100 मिलीग्राम पोटेशियम की आवश्यकता होती है.

अगर पोटेशियम (Potassium) का स्तर सामान्य नहीं है तो हृदय रोग (Heart Disease), स्ट्रोक (Stroke) और दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ने जैसे समस्याएं खड़ी हो सकती हैं. आहार में पोटेशियम की कमी से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.



  • Last Updated:
    November 13, 2020, 6:32 AM IST

पोटेशियम (Potassium) एक ऐसा मिनरल यानी खनिज पदार्थ है जो कि शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए आवश्यक है. इसकी कमी से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. पोटेशियम मांसपेशियों को विकसित करने, शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने और तंत्रिकाओं को स्वस्थ रूप से काम करने में सहायक है. किडनी (Kidney) शरीर का ऐसा मुख्य अंग है जो कि पोटेशियम की मात्रा को नियंत्रित करती है और अतिरिक्त को पेशाब (Toilet) के जरिए शरीर से बाहर निकाल देती है. कार्बोहाइड्रेट्स और प्रोटीन को तोड़ने तथा उनके इस्तेमाल के लिए शरीर को पोटेशियम की जरूरत होती है. इसकी कमी होने पर कई रोग हो सकते हैं. myUphar के अनुसार पोटेशियम का स्तर बनाए रखना बहुत जरूरी है. इसका निम्न स्तर हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ा हो सकता है.

अगर पोटेशियम का स्तर सामान्य नहीं है तो हृदय रोग, स्ट्रोक और दिल का दौरा पड़ने जैसे समस्याएं खड़ी हो सकती हैं. आहार में पोटेशियम की कमी से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. विशेषकर महिलाओं में हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए पोटेशियम की जरूरत होती है. पोटेशियम का निम्न स्तर व्यक्ति की त्वचा को भी नुकसान पहुंचाता है. इसकी कमी से त्वचा रूखी हो सकती है और दाने या मुंहासे हो सकते हैं. बालों का झड़ना भी इसकी कमी की एक निशानी है. इसकी कमी होने से माइग्रेन और सिरदर्द की स्थिति बनी रहती है.

पोटेशियम की कमी से कुछ लक्षण नजर आने लगते हैं, जिससे व्यक्ति समझ सकता है कि वह सही आहार नहीं ले रहा है. पोटेशियम की कमी के संकेत हल्के ही होते हैं, इसलिए विशेष रूप से इस पर गौर करना पड़ता है. इसका बड़ा लक्षण है कि पैरों या बाजुओं में कमजोरी या थकान महसूस होने लगती है जो कई बार इतनी गंभीर होती है कि पैर हिलाने में भी तकलीफ होती है. यह पोटेशियम की कमी का पहला संकेत है. इसके अलावा त्वचा का सुन्न होना या झुनझुनी आना भी अन्य लक्षण है. यह आमतौर पर टांगों, पैरों या बाजुओं में महसूस होती है. मांसपेशियों में ऐंठन या मरोड़, मतली, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, कब्ज, पेट फूलना आदि भी इसके संकेत हो सकते हैं.myUphar से जुड़ीं डॉ. मेधावी अग्रवाल का कहना है कि शरीर के मुख्य कार्यों के लिए हर व्यक्ति को रोजाना कम से कम 100 मिलीग्राम पोटेशियम की आवश्यकता होती है. इसकी कमी को आसानी से खानपान की मदद से पूरी कर सकते हैं. पोटेशियम के प्राकृतिक और अच्छे स्रोतों में केला, एवोकाडो, बादाम, मूंगफली, संतरा, अंगूर, हरी पत्तेदार सब्जियों, जड़ वाली सब्जियों, गाजर, आलू, शकरकंद, खजूर, दही, टमाटर और दूध हैं. पोटेशियम का स्तर बनाए रखने से मस्तिष्क के कार्य भी सुचारु रूप से होते हैं. यह मस्तिष्क के विद्युतीय तरंगों को नियंत्रित करता है, जिससे मस्तिष्क के कार्यों पर खासा असर दिखता है. यह याद्दाश्त को भी मजबूत करता है.

हालांकि, जिस तरह पोटेशियम शरीर के लिए लाभदायक है, उसी तरह इसकी अधिक मात्रा हानिकारक है. ज्यादा मात्रा से किडनी कमजोर और डैमेज हो सकती है.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, पोटेशियम के स्रोत, फायदे और नुकसान पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।





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