कोरोना वायरस से पहले इन वायरसों ने ली है लाखों लोगों की जान, जानें इनके नाम
Spread the love


आज भी कोरोना वायरस से भी ज्यादा खतरनाक बीमारियां दुनिया में मौजूद हैं जिनसे जान जाने का खतरा सबसे ज्यादा है.

कोविड-19 (Covid-19) महामारी से पहले भी मानव जाति को जानलेवा महामारियों का सामना करना पड़ा है. इन महामारियों ने आबादी (Population) के एक बड़े हिस्से को मौत के मुंह में धकेल दिया था.

पिछले कुछ समय से कोरोना वायरस (Coronavirus) ने कोहराम मचा रखा है. कोरोना के चलते पूरी दुनिया में लाखों लोगों ने अपनी जान गवाई है. लेकिन क्या आपको पता है कि कोविड-19 (Covid-19) महामारी से पहले भी मानव जाति को जानलेवा महामारियों का सामना करना पड़ा है. इन महामारियों ने आबादी के एक बड़े हिस्से को मौत के मुंह में धकेल दिया था. आज भी कोरोना वायरस से भी ज्यादा खतरनाक बीमारियां दुनिया में मौजूद हैं जिनसे जान जाने का खतरा सबसे ज्यादा है.

इबोला
पश्चिम अफ्रीका में इबोला वायरस का प्रकोप साल 2013 से 2016 के बीच देखने को मिला था. इसमें 28610 लोग संक्रमित हुए थे और 11300 लोगों की जान गई थी. गिनिया में शुरू हुआ यह वायरस लिबेरिया और सीरिया लियोना में भी फैल गया था. यह साल 2016 में खत्म हुआ था. इसका ट्रांसमिशन खून, उल्टी, दस्त से पैदा होता है. इंफेक्शन के 2 से 21 दिनों के बीच इसके लक्षण दिखाई देते हैं. प्रयोग के रूप में शुरू की गई वैक्सीन से इस पर काबू पाया जा सका है.

ये भी पढ़ें – कोरोना में क्‍यों की जाती है कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, जानिए क्‍या है येHIV/AIDS

ह्यूमन इम्यूनो डेफिसियंसी वायरस यानी HIV साल 1981 में आया था और अब तक इससे 35 मिलियन लोगों की जान जा चुकी है. WHO के अनुसार दक्षिण अफ्रीका में सबसे ज्यादा 7 मिलियन लोग इससे प्रभावित हुए हैं. इम्यून सिस्टम में मुख्य भूमिका निभाने वाली सफेद कोशिकाओं को HIV खत्म करता है. यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म करता है, जिससे अन्य रोग भी शरीर में उत्पन्न हो जाते हैं. यह असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाने से, संक्रमित के खून से, संक्रमित मां से पेट में पल रहे बच्चे को हो सकता है.

SARS-Cov
सेवेयर रेस्पाईरेटरी सिंड्रोम (SARS) सबसे पहले एशिया और कनाडा में उत्पन्न होकर साल 2002-2003 में फैला था. यह 37 देशों में फैला और इसमें बुखार, शरीर दर्द, निमोनिया होता है. साल 2002 में हांगकांग में उत्पन्न होकर यह विश्व के कई देशों में फैला. साल 2003 में इस पार काबू पाया गया और वहां से अब तक कोई केस सामने नहीं आया है. वैज्ञानिकों को डर है कि यह वायरस जानवरों में रह सकता है और भविष्य में बीमारियों को जन्म दे सकता है.

इसे भी पढ़ेंः मास्क पहनने से पुरुषों को हो सकती हैं स्किन संबंधी समस्‍याएं, ऐसे करें दाढ़ी की देखभाल

हेपेटाइटिस
वायरल हेपेटाइटिस से साल 2015 में 1.34 मिलियन लोगों की मौत हुई थी. WHO के अनुसार इससे मरने वालों का प्रतिशत 22 फीसदी तक बढ़ गया है. हेपेटाइटिस A, D, E सहित पांच तरह के हेपेटाइटिस हैं लेकिन B और C से सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं. इसमें पुराने लीवर की बीमारी या लीवर कैंसर से मौत होती है. अनुमान के अनुसार दुनिया में 4.4 फीसदी लोग वायरल हेपेटाइटिस से संक्रमित होते हैं. इनमें ज्यादातर हेपेटाइटिस C के मामले होते हैं. हेपेटाइटिस B के लिए वैक्सीन उपलब्ध होने के बाद भी लोग इलाज नहीं करवा पाते. हेपेटाटिस C के लिए एंटीवायरल उपलब्ध है. इसका मुख्य कारण यही है कि सस्ते टेस्ट की सुविधा सीमित है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)





Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here