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इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस गोविंद माथुर बुधवार सुबह 10 चारों नवनियुक्त चारों एडिश्नल जजों को शपथ दिलवाएंगे

नए एडीश्नल जजों की नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से दो वर्ष के लिए की गई है. अपर न्यायमूर्ति के तौर पर संजय कुमार पचौरी, सुभाष चंद्र शर्मा, सुभाष चंद और सरोज यादव शपथ लेंगे

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 15, 2020, 10:00 PM IST

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में नवनियुक्त चार अपर न्यायमूर्ति बुधवार को शपथ ग्रहण करेंगे. चीफ जस्टिस गोविंद माथुर (Chief Justice Govind Mathur) के न्याय कक्ष में सुबह दस बजे शपथ ग्रहण समारोह (Oath Ceremony) आयोजित किया जाएगा. कोविड 19 (Covid 19) के प्रकोप को देखते हुए चीफ जस्टिस सोशल डिस्टेन्सिंग (Social Distancing) नियमों का पालन कराते हुए नए एडीशनल जजों को शपथ दिलाएंगे.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चार नए जजों की नियुक्ति की अनुमति प्रदान की थी. जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में चार नए एडीश्नल जजों की नियुक्ति के लिए 11 सितंबर को केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की थी. हाईकोर्ट में नवनियुक्त होने वाले सभी न्यायमूर्ति न्यायिक सेवा कैडर के जिला जज रैंक के हैं. नए एडीशनल जजों की नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से दो वर्ष के लिए की गई है. अपर न्यायमूर्ति के तौर पर संजय कुमार पचौरी, सुभाष चंद्र शर्मा, सुभाष चंद और सरोज यादव शपथ लेंगे.

शपथ लेने के बाद हाईकोर्ट में कार्यरत जजों की संख्या होगी 100

इलाहाबाद हाईकोर्ट को न्यायिक सेवा के चार नए एडिश्नल जज मिलने के बाद चीफ जस्टिस गोविंद माथुर को छोड़कर कार्यरत जजों की संख्या 100 हो जाएगी. हालांकि मौजूदा समय में इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रधान पीठ में 68 जज कार्यरत हैं. जबकि लखनऊ खंडपीठ में 28 जज कार्यरत हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमों के बोझ के लिहाज से जजों की संख्या काफी कम है. हाईकोर्ट में स्वीकृत जजों की कुल संख्या 160 है. मगर आज तक कभी भी यहां पूरे जज नहीं रहे हैं. अधिकतम 110 जजों का आंकड़ा पहुंचा है. हाल के दिनों में कुछ जजों के रिटायर होने से जजों की संख्या घटकर 96 तक पहुंच गई थी.बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में नौ लाख से ज्यादा मुकदमे पेंडिंग हैं. कोविड 19 के चलते बीते मार्च महीने से इलाहाबाद हाईकोर्ट में नियमित रूप से मुकदमों की सुनवाई नहीं हो पा रही है. हाईकोर्ट में केवल नए मामले सुने जा रहे हैं. पुरानी मामलों की पेंडेंसी बढ़ती जा रही है. एक जुलाई, 2020 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रधान पीठ में 7,38,529 मुकदमे पेंडिंग थे. वहीं लखनऊ खंडपीठ में 2,11,127 मुकदमे पेंडिंग थे. इस तरह देखें तो कुल मिलाकर 9,49,701 मुकदमे इलाहाबाद हाईकोर्ट पर भारी भरकम बोझ हैं. जो कि जजों की कमी के चलते कम नहीं हो पा रहा है.





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