एडजस्टमेंट डिसऑर्डर या डायस्टियमिया की शिकार हो रही हैं महिलाएं, जानें कारण


महिलाएं (Women) अत्याचार व घरेलू हिंसा (Domestic Violence) के कारण कई बार मानसिक अवसाद व तनाव (Stress) की शिकार हो जाती हैं. मेडिकल साइंस के अनुसार, अत्याचार या हिंसा के कारण ज्यादातर महिलाएं एडजस्टमेंट डिसऑर्डर या डायस्टियमिया (Dysthymia) जैसी बीमारियों से ग्रसित हो जाती है. आइए जानते हैं इस बीमारी के बारे में और क्या हैं इसके लक्षण.

ऐसे होता है एडजस्टमेंट डिसऑर्डर

आमतौर पर अधिकतर समाजों में महिलाओं को शादी के बाद दूसरे परिवार में जाकर रहना होता है. नए माहौल में सामंजस्य स्थापित कर पाने में अधिकतर महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है. कई महिलाओं में यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है. myUpchar के अनुसार, कोई भी व्यक्ति 6 माह में खुद को माहौल के प्रति अनुकूल बना लेता है लेकिन कई लोग जब ऐसा नहीं कर पाते हैं तो वे डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं.एडजस्टमेंट डिसऑर्डर के ये हो सकते हैं लक्षण

जब महिलाएं एडजस्टमेंट डिसऑर्डर की शिकार होती हैं तो उनका व्यवहार विद्रोही हो जाता है. बगैर किसी कारण के चिंतित रहना, उदासी, एकाग्रता में कमी, खुद को लाचार महसूस करना, उत्साह की कमी, डर डर कर रहना, अच्छी नींद न आने जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं. इसके अलावा मांसपेशियों में तनाव, खिंचाव, दर्द या सूजन, पाचन क्रिया में गड़बड़ी जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं. मानसिक तनाव के चलते कई बार पारिवारिक रिश्ते भी प्रभावित होने लगते हैं.

घरेलू हिंसा के कारण भी हो सकता है डायस्टियमिया

myUpchar के अनुसार, डायस्टियमिया एक लंबे समय तक चलने वाला निम्न श्रेणी का अवसाद है और यह ज्यादातर घरेलू महिलाओं में होता है. इसका कारण घरेलू हिंसा या प्रताड़ना भी हो सकता है. ऐसी महिलाएं जो अकेलेपन का शिकार होती हैं या ज्यादातर समय निराश रहती हैं, उनमें डायस्टियमिया के लक्षण ज्यादा पाए जाते हैं. इसके अलावा भूख लगने में कमी, नींद का अभाव, थकान, आत्मसम्मान में कमी महसूस करने जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं.

लॉकडाउन में बढ़े एडजस्टमेंट डिसऑर्डर या डायस्टियमिया

कोरोना वायरस के कारण जब देशव्यापी लॉकडाउन लगा तो घरेलू हिंसा के मामले भी बढ़े. कई रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि लॉकडाउन में घरेलू हिंसा के मामले दोगुने हो गए. इस कारण भी महिलाओं में एडजस्टमेंट डिसॉर्डर या डायस्टियमिया के लक्षण बढ़े हैं.

तनाव में हैं महिलाएं तो ऐसे करें उपचार

घरेलू हिंसा के कारण यदि कोई महिला मानसिक अवसाद या अन्य शारीरिक बीमारियों से जूझती है तो सबसे पहले जरूरी है कि वह इसके खिलाफ आवाज उठाएं.

इसके अलावा किसी अच्छे डॉक्टर या मनोचिकित्सक से सलाह लें और अपने साथ हो रही अन्यायपूर्ण घटनाओं के बारे में जानकारी दें. एक अच्छा मनोचिकित्सक महिला को इस समस्याओं से जूझने की तरीके बताने से साथ शारीरिक समस्याओं के इलाज में भी मदद कर सकता है.

घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को मानसिक शांति के लिए मेडिटेशन, योग, प्राणायाम भी करना चाहिए. कुछ महिलाओं में डिप्रेशन के लक्षण ज्यादा दिखाई देते हैं. ऐसा महिलाओं में हार्मोन में बदलाव के कारण भी होता है. इसके अलावा पीरियड्स के कारण भी महिलाएं तनाव में रहती है. घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को इलाज के दौरान डॉक्टर को सिर्फ बीमारियों के लक्षण ही नहीं बताने चाहिए, जबकि उसके कारण भी बताने चाहिए ताकि इसका सही इलाज हो सके.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, अवसाद के लक्षण, कारण, बचाव और इलाज पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.





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